दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को विमल इलायची बनाने वाली कंपनी पीबी एग्रो एलएलपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।
Vimal Elaichi Case: Delhi HC Rejects Plea, Delivers Major Verdict
Vimal Elaichi Case: Delhi HC Rejects Plea, Delivers Major Verdict |
नई दिल्ली [भारत]: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को विमल इलायची बनाने वाली कंपनी पीबी एग्रो एलएलपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा ब्रांड एंबेसडरों, जिनमें बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ शामिल हैं, को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र न्यायालय के पास नहीं है।
महाराष्ट्र एफडीए ने जारी किया था नोटिस
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा कि दिनांक 11 अगस्त, 2026 का विवादित नोटिस महाराष्ट्र सरकार के अधीन मुंबई स्थित एफडीए द्वारा स्वतंत्र रूप से जारी किया गया था और यह मुंबई निवासी तीन ब्रांड एंबेसडरों को संबोधित था। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा है कि मामले का कोई महत्वपूर्ण या मुख्य भाग दिल्ली में उत्पन्न हुआ है।
दिल्ली में कंपनी होने का तर्क अदालत ने नहीं माना
न्यायालय ने पीबी एग्रो के इस तर्क को खारिज कर दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय इस मामले में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है क्योंकि कंपनी दिल्ली में स्थित है, उसका विज्ञापन अभियान कथित तौर पर दिल्ली से तैयार और प्रबंधित किया गया था, और ब्रांड एंबेसडरों को भुगतान भी दिल्ली से किया गया था। अदालत ने गौर किया कि पीबी एग्रो को कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था, न ही कंपनी को कोई जवाब देने, कोई विज्ञापन हटाने, दस्तावेज़ पेश करने या महाराष्ट्र एफडीए के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था।
नोटिस रद्द करने की मांग पर अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि पीबी एग्रो द्वारा मांगी गई मुख्य राहत मुंबई स्थित एफडीए द्वारा जारी नोटिस को रद्द करना था। उस नोटिस के कथित गैर-अनुपालन के लिए कोई भी कार्रवाई उस प्राधिकरण द्वारा ही विचारणीय होगी जिसने इसे जारी किया था। दिल्ली स्थित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय या भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को पक्षकार बनाने मात्र से क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं हो जाता, जबकि उनके विरुद्ध कोई विशिष्ट राहत नहीं मांगी गई थी और न ही उनके द्वारा जारी किसी निर्णय या निर्देश को चुनौती दी गई थी।
एफएसएसएआई को लेकर भी अदालत ने दी स्पष्टता
अदालत ने इस तथ्य पर भी भरोसा करने से इनकार कर दिया कि एफएसएसएआई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सर्वोच्च वैधानिक निकाय है। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि एफएसएसएआई ने महाराष्ट्र एफडीए को ब्रांड एंबेसडरों के खिलाफ नोटिस जारी करने या कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था। इसलिए, नोटिस महाराष्ट्र प्राधिकरण की एक स्वतंत्र कार्रवाई बनी रही।
मुख्य विवाद महाराष्ट्र से जुड़ा: हाई कोर्ट
उच्च न्यायालय ने आगे पाया कि पीबी एग्रो के स्वयं के बयानों से स्पष्ट होता है कि वास्तविक विवाद महाराष्ट्र में था। कंपनी ने स्वयं इस आधार पर नोटिस को चुनौती दी थी कि विमल पान मसाला महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है, जबकि कथित तौर पर इसका उत्पादन या बिक्री वहां नहीं होती है, और महाराष्ट्र एफडीए ने विज्ञापित विमल इलायची उत्पाद को प्रतिबंधित पान मसाले से गलत तरीके से जोड़ा है। न्यायालय ने कहा कि इन बयानों से यह सिद्ध होता है कि मुख्य विवाद महाराष्ट्र एफडीए द्वारा महाराष्ट्र में कथित गतिविधियों के संबंध में की गई कार्रवाई की वैधता और औचित्य से संबंधित है।
सीसीपीए की कार्यवाही से दिल्ली को अधिकार क्षेत्र नहीं
दिल्ली स्थित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के समक्ष चल रही कार्यवाही पर न्यायालय ने यह माना कि उनकी लंबितता से दिल्ली उच्च न्यायालय को क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं होता। न्यायालय ने कहा कि सीसीपीए की कार्यवाही और महाराष्ट्र एफडीए का नोटिस प्रथम दृष्टया अलग-अलग प्राधिकरणों की अलग-अलग कार्रवाइयों से उत्पन्न अलग-अलग कार्यवाही हैं। याचिका में सीसीपीए के किसी आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी और न ही सीसीपीए ने महाराष्ट्र एफडीए के नोटिस के संबंध में कोई आदेश पारित किया था।
महाराष्ट्र को बताया अधिक उपयुक्त मंच
न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि याचिका में उल्लिखित प्रत्येक तथ्य विवाद के मूल कारण का हिस्सा नहीं होता। क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार प्राप्त करने के लिए तथ्यों का विवाद से प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण संबंध होना आवश्यक है।
न्यायालय ने यह भी माना कि यदि दिल्ली में विवाद का कोई अप्रत्यक्ष या आकस्मिक कारण भी उत्पन्न होता है, तो भी सुविधाजनक मंच के सिद्धांत के तहत महाराष्ट्र अधिक उपयुक्त और सुविधाजनक मंच रहेगा, क्योंकि संपूर्ण विवाद और वास्तविक नोटिस प्राप्तकर्ता महाराष्ट्र से संबंधित हैं।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से किया अंतर
उच्च न्यायालय ने पीबी एग्रो द्वारा उद्धृत बख्शीश अहमद बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से स्पष्ट रूप से अंतर बताया। न्यायालय ने कहा कि यह मामला बीएसएफ सदस्य की बर्खास्तगी से संबंधित था और इसमें एक विशिष्ट वैधानिक और प्रशासनिक ढांचा शामिल था जिसके तहत दिल्ली के अधिकारियों की इसमें अनिवार्य भूमिका थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि वर्तमान मामले में ऐसी परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं।
महाराष्ट्र की अदालतों में शिकायत उठाने की बात
तदनुसार, उच्च न्यायालय ने माना कि क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार के अभाव में याचिका विचारणीय नहीं है और पीबी एग्रो के लिए एफडीए नोटिस से संबंधित अपनी शिकायतों को उठाने के लिए महाराष्ट्र की अदालतें ही उपयुक्त मंच हैं। पीबी एग्रो की चुनौती के गुण-दोष पर न्यायालय द्वारा कोई राय व्यक्त किए बिना याचिका खारिज कर दी गई। लंबित आवेदन का भी निपटारा कर दिया गया।
(एएनआई)
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