अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते देश में दवाओं की सरकारी आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है।
भोपाल/जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते देश में दवाओं की सरकारी आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। दवा कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की उपलब्धता, आयात-निर्यात में बाधाएं और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण उत्पादन और सप्लाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
नियमों में राहत की मांग
फार्मा उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा हालात को देखते हुए सप्लाई से जुड़े नियमों में राहत दी जाए। कंपनियों का कहना है कि सरकारी आपूर्ति में देरी होने पर उन पर पेनल्टी लगाई जाती है, जिसे फिलहाल स्थगित किया जाना चाहिए।
कैश पेमेंट सिस्टम लागू करने की मांग
इसके साथ ही उद्योगों ने कैश पेमेंट सिस्टम लागू करने की मांग भी रखी है, ताकि कंपनियों को समय पर भुगतान मिल सके और उत्पादन प्रभावित न हो। उनका तर्क है कि भुगतान में देरी से कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ता है, जिससे दवाओं की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ सकता है।
लंबे समय तक बनीं रही स्थिति तो होगी परेशानी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आवश्यक दवाओं की कमी की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार और उद्योग के बीच समन्वय बनाकर त्वरित समाधान निकालना जरूरी होगा।
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