भोपाल। सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट (स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन) की दिशा में भोपाल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शहर के...
भोपाल। सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट (स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन) की दिशा में भोपाल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शहर के आदमपुर छावनी में 220 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित टोरिफाइड चारकोल प्लांट का ट्रायल रन सफलतापूर्वक शुरू हो गया है। यह प्लांट न केवल शहर की गंदगी को साफ करेगा, बल्कि कचरे को बहुमूल्य ईंधन में भी बदलेगा। इसके लिए ₹220 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक चारकोल प्लांट लगाया जाएगा। शुरुआती तीन दिनों में 800 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा। यह प्लांट प्रतिदिन 400 टन कचरे से कोयला (चारकोल) तैयार करेगा।
नगर निगम व संबंधित विभाग की पहल
भोपाल नगर निगम और संबंधित विभाग द्वारा कचरा प्रबंधन की इस समस्या को सुलझाने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इस प्लांट में टोरिफैक्शन तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसमें कचरे को उच्च तापमान पर गर्म करके उसे कोयले जैसे ठोस ईंधन में बदल दिया जाता है।
सैकड़ो टन कचड़े का होगा उपयोग
शहर में रोजाना निकलने वाले सैकड़ों टन सूखे कचरे का सही उपयोग हो सकेगा। यहाँ से बनने वाले चारकोल का उपयोग थर्मल पावर प्लांट में कोयले के विकल्प के रूप में किया जा सकेगा, जिससे प्राकृतिक कोयले की खपत कम होगी। लैंडफिल साइट (आदमपुर छावनी) पर कचरे के ढेर और उससे होने वाले वायु प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी।
प्लांट की कार्यक्षणता की हो रही जांच
वर्तमान में प्लांट का परीक्षण (Trial Run) चल रहा है। विशेषज्ञों की देखरेख में 800 टन कचरे को प्रोसेस किया जा रहा है ताकि प्लांट की कार्यक्षमता और गुणवत्ता की जांच की जा सके। सफल ट्रायल के बाद इसे पूर्ण क्षमता के साथ संचालित किया जाएगा।
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