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मध्य प्रदेश की ये 5 सर्दियों की सब्ज़ियाँ ज़रूर..

मध्य प्रदेश की ये 5 सर्दियों की सब्ज़ियाँ ज़रूर क्यों चखनी चाहिए?

MP News : बालाघाट। सर्दियों के आते ही तापमान गिरता है और साथ ही मौसमी उपज की भरपूर आवक भी शुरू हो जाती है।

मध्य प्रदेश की ये 5 सर्दियों की सब्ज़ियाँ ज़रूर क्यों चखनी चाहिए

मध्य प्रदेश की ये 5 सर्दियों की सब्ज़ियाँ ज़रूर क्यों चखनी चाहिए? |

MP News : बालाघाट। सर्दियों के आते ही तापमान गिरता है और साथ ही मौसमी उपज की भरपूर आवक भी शुरू हो जाती है। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बालाघाट ज़िले में सर्दियों के मौसम में स्थानीय बाज़ारों में कई ऐसी सब्ज़ियाँ दिखाई देती हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अत्यंत पौष्टिक भी होती हैं। ये सब्ज़ियाँ आमतौर पर जंगलों और खुले खेतों में मिलती हैं और खासकर सर्दियों में ही उपलब्ध होती हैं। इनकी उपलब्धता कम समय के लिए होती है, इसलिए स्थानीय लोग पूरे साल इनके आने का इंतज़ार करते हैं। बालाघाट की ऐसी पाँच प्रसिद्ध सर्दियों की सब्ज़ियों पर एक नज़र।

सर्दियों का मौसम आते ही मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले के बाज़ार मौसमी सब्ज़ियों से भर जाते हैं। जंगलों और खेतों में मिलने वाली ये सब्ज़ियाँ थोड़े समय के लिए ही आती हैं, लेकिन स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल होती हैं। 

लाखौरी (लखड़ी/तिविरा)

बालाघाट में धान की कटाई के बाद किसान लाखौरी बोते हैं, जिसे स्थानीय तौर पर लखड़ी या तिविरा भी कहा जाता है। यह मुख्यतः मध्य प्रदेश के बालाघाट के अलावा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी उगाई जाती है। यह पौधा दिसंबर–जनवरी में तैयार होता है और इसी समय इसकी पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं। इन पत्तियों को पीसकर सब्ज़ी बनाई जाती है, जिसका स्वाद हल्का मीठा और खुशबू मिट्टी जैसी (earthy) होती है। यह पोषण से भरपूर मानी जाती है। 

चौलाई (अमरनाथ साग)

बालाघाट के बाज़ारों में चौलाई का साग भी बहुत पसंद किया जाता है। इसे अक्सर खसखस या सेम/फलियों के साथ पकाया जाता है, जो लोगों को काफी भाता है। एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण चौलाई को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसे आमतौर पर आलू के साथ बनाया जाता है और सूखी लाल मिर्च स्वाद बढ़ाती है। इसे प्रायः रोटी के साथ खाया जाता है। 

लाल साग (रेड अमरनाथ/रेड अमरंथ)

लाल पत्तेदार साग (लाल साग) मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में खूब खाया जाता है। कई लोग इसकी करी/रसदार सब्ज़ी बहुत पसंद करते हैं। बालाघाट में इसे अक्सर आलू और बैंगन के साथ पकाया जाता है। हल्की ग्रेवी और चावल के साथ परोसने पर यह स्वादिष्ट लगता है; इसे खाने पर हाथों पर लाल रंग की हल्की छाप भी रह जाती है—जिसे खाने के शौकीन लोग खास बात मानते हैं। यहसाग एनीमिया (खून की कमी) में मददगार और हड्डियाँ मजबूत करने वाले पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। 

5/5 — चना साग (निपिंग स्टेज की कोमल टहनियाँ)

चना बोने के बाद पौधे में दिसंबर–जनवरी के दौरान एक अवस्था आती है जिसे “निपिंग” कहा जाता है। इसमें पौधे की ऊपरी कोमल कोंपलें तोड़कर खास मौसमी साग बनाया जाता है। यह अब स्थानीय बाज़ारों में उपलब्ध है और इसे कई लोग ‘सागों का राजा’ भी कहते हैं। यह फाइबर से भरपूर होता है, कब्ज जैसी पाचन समस्याओं में राहत देता है और स्वाद में हल्की खटास लिए होता है। इसे दाल के साथ या सूखी सब्ज़ी के रूप में भी बनाया जाता है।

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