योगी आदित्यनाथ ने भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा, यूपी बोर्ड परीक्षा, किसानों की बिजली-सिंचाई और चीनी मिलों पर सरकार की नीतियों का खाका सामने रखा।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी भर्ती से लेकर शिक्षा, कृषि और किसानों तक सरकार की प्राथमिकताओं का खाका खींचा। उन्होंने आयोगों को भर्ती प्रक्रिया तेज करने, यूपी बोर्ड की परीक्षा-परिणाम व्यवस्था में बदलाव और किसानों के लिए बिजली, सिंचाई व आपदा राहत जैसे कदमों का दावा किया।
लखनऊ में मिशन रोजगार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भर्ती संस्थाओं को काम करने की स्वतंत्रता दी है, इसलिए अब अधियाचन से परिणाम तक अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने किसानों और कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।
भर्ती प्रक्रिया में छह महीने से ज्यादा की देरी नहीं
मुख्यमंत्री ने आयोगों और भर्ती बोर्डों के अधिकारियों को स्पष्ट समय-सीमा के साथ काम करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने संस्थाओं को स्वतंत्रता दी है तो उन्हें समय पर परिणाम भी देना चाहिए। योगी ने निर्देश दिया कि अधियाचन जाने के बाद परिणाम आने में छह महीने से अधिक समय नहीं लगना चाहिए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों के लिए भी समयसीमा बताई- एक महीने के भीतर विज्ञापन और अगले दो महीने में परीक्षा कराने की दिशा में काम हो। मुख्यमंत्री ने प्रक्रिया को सहज और सरल बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जब युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जाता है तो उसके परिणाम सामने आते हैं।
आयोगों को पारदर्शी भर्ती के लिए मिली तारीफ
योगी ने कहा कि आयोग और बोर्ड बिना भेदभाव, आरक्षण नियमों का पालन करते हुए और मेरिट के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन कर रहे हैं। उन्होंने इसे प्रशंसनीय बताते हुए कहा कि योग्यतम युवाओं का चयन होने पर उनकी ऊर्जा का लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। यानी मुख्यमंत्री ने सरकारी भर्ती को केवल नौकरी देने की प्रक्रिया के बजाय प्रदेश की उत्पादक क्षमता से जोड़कर पेश किया।
यूपी बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक उस समय यूपी बोर्ड की परीक्षा में करीब तीन महीने लगते थे और परिणाम आने में भी लगभग तीन महीने का समय लगता था। इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया में करीब तीन महीने और लगने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। योगी ने पिछली सपा सरकार पर नकल को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए इसे युवाओं के भविष्य से जोड़कर पेश किया।
'एक महीने में परीक्षा-परिणाम नहीं तो कुर्सी छोड़ें'
योगी ने अपने मुख्यमंत्री बनने के बाद का एक प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि 2017 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों से उन्होंने परीक्षा और परिणाम एक महीने में पूरा करने को कहा था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अधिकारियों से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने कहा था, "तुम कुर्सी छोड़ो, मैं एक महीने के अंदर यह कराऊंगा।" योगी ने दावा किया कि अब यूपी बोर्ड के 56 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा 14 दिन में पूरी होती है और उसके अगले 14 दिन में परिणाम आ जाता है।
उन्होंने कहा कि पहले फरवरी में शुरू होने वाली परीक्षाएं जून की भीषण गर्मी तक चलती थीं, जबकि अब नकलविहीन परीक्षा और समय पर परिणाम की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में भी सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से बच्चों की स्किलिंग, करियर और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करने को कहा।
9.30 लाख नौकरियों को 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' से जोड़ा
मुख्यमंत्री ने 9.30 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियों को प्रदेश के आर्थिक बदलाव से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने यूपी को डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में लाभ पहुंचाया है। योगी के मुताबिक, इन युवाओं ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में योगदान दिया है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं ने यूपी को बीमारू राज्य की स्थिति से निकालकर टॉप-3 राज्य बनाने में भी भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी सरकार युवाओं की उपेक्षा करके न तो विकास कर सकती है और न ही बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है।
जापान से लेकर इजरायल तक यूपी के युवाओं की मांग का दावा
योगी ने अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों को भी प्रदेश में आए बदलाव से जोड़ा। उन्होंने हाल में यूपी आए जापानी प्रतिनिधिमंडल का जिक्र करते हुए कहा कि 240 सदस्यों का दल भारत आया था, जिसमें बड़े नेता, अधिकारी और उद्योग-जगत के प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, जापानी प्रतिनिधिमंडल यूपी के युवाओं को जापान में रोजगार देने में रुचि रखता है। उन्होंने कहा कि जर्मनी और इजरायल भी प्रदेश के युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।
इजरायल के संदर्भ में योगी ने कहा कि यूपी के करीब 5,000 युवा वहां गए हैं और करीब 1.5 लाख रुपये प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ये युवा अपने घर भी पैसा भेज रहे हैं और उनके रहने-खाने की व्यवस्था भी है। योगी ने यह भी कहा कि इजरायल के युद्ध लड़ने के दौरान भी यूपी के युवा वहां काम कर रहे थे।
किसान और बिजली भी सरकार के राजनीतिक नैरेटिव के केंद्र में
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले किसानों की स्थिति को लेकर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय किसान खेत पर जाने से डरता था क्योंकि उसकी मोटर चोरी हो जाती थी। योगी का आरोप था कि "2017 के पहले सरकार के लोग ही मोटर चोरी कराते थे।" उन्होंने कहा कि अब चोरी करने वालों को कार्रवाई का डर है, इसलिए स्थिति बदली है।
बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यूपी के किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 16 लाख से अधिक निजी ट्यूबवेलों का 3,000 करोड़ रुपये का बिजली बिल सरकार ने माफ किया है और अब उसका भुगतान प्रदेश सरकार करती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यूपी में पहली बार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी का लाभ मिला है।
चीनी मिलों पर योगी ने गिनाया पुराना हिसाब
गन्ना किसानों की स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने 2009 से चीनी मिलों पर बकाया होने का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2007 से 2017 के बीच सपा-बसपा सरकारों ने 29 चीनी मिलें बंद कीं और 21 मिलों को औने-पौने दाम पर बेच दिया। योगी ने गोरखपुर मंडल की एक चीनी मिल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उसे महज 3 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उसका स्क्रैप ही 10 करोड़ रुपये में बिक सकता था। उन्होंने उस जमीन की मौजूदा कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपये होने का भी दावा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने इसके खिलाफ आंदोलन किया था और माफिया को मनमानी नहीं करने दी। उनके मुताबिक, पहले की सरकारें चीनी मिलें बंद करती थीं, जबकि अब प्रदेश में 122 चीनी मिलें चल रही हैं।
कृषि विकास दर 30% तक ले जाने का लक्ष्य
योगी ने कृषि क्षेत्र की क्षमता पर जोर देते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इसे आगे 30 फीसदी तक ले जाया जा सकता है। इसके लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क शुरू होने की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब तक 3.25 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया।
2014-15 की आपदा राहत का पैसा 2017 में बांटने का दावा
मुख्यमंत्री ने 2014-15 में आए हुदहुद साइक्लोन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान असमय अतिवृष्टि, अनावृष्टि और अत्यधिक बारिश से फसल चक्र प्रभावित हुआ था। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने आपदा राहत के लिए पैसा उपलब्ध कराया था, लेकिन यह राशि 2017 तक किसानों को नहीं मिल पाई थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने यह पैसा किसानों को बांटा।
योगी ने मौजूदा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष, सर्पदंश और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं में किसान, बटाईदार और उनके परिवारों को 24 घंटे के भीतर 5 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। उन्होंने फसल नुकसान के मामले में आपदा राहत और फसल बीमा को अलग-अलग बताते हुए कहा कि फसल बीमा की राशि बाद में मिल सकती है, लेकिन आपदा राहत की रकम किसान को तत्काल दिलाई जाती है।
सिंचाई परियोजनाओं से लाखों हेक्टेयर भूमि जोड़ने का दावा
योगी ने कहा कि 2017 से पहले किसान सरकार के एजेंडे में नहीं था, जबकि मौजूदा सरकार ने सिंचाई का दायरा बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि 2018 में बाणसागर परियोजना पूरी हुई, जिससे ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। अर्जुन सहायक परियोजना के जरिए महोबा से बांदा तक सिंचाई सुविधा बढ़ाने की बात भी उन्होंने कही। मुख्यमंत्री ने सरयू राष्ट्रीय नहर परियोजना का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक 1972 में शुरू हुई यह परियोजना 2021 में पूरी हुई और इससे बहराइच से गोरखपुर तक 9-10 जनपदों में 14 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिल रही है।
नवनियुक्त मंडी सचिवों को दिया किसानों से जुड़ने का एजेंडा
योगी ने नवनियुक्त मंडी सचिवों को सिर्फ प्रशासनिक भूमिका तक सीमित नहीं रहने का संदेश दिया। उन्होंने मंडियों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कचरा निस्तारण, रंगरोगन, मंडी की सड़कों के समय पर निर्माण और प्रभावी शेड की व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को बुनियादी सुविधाएं और सम्मान देने की बात भी कही।
उन्होंने मंडियों में किसानों की उपज की खरीद और एमएसपी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा मंडियों को ई-नाम से जोड़ने की कार्रवाई तेज करने को कहा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने वैल्यू एडिशन, ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर और आधुनिक कृषि तकनीकों से उन्हें जोड़ने पर जोर दिया। योगी ने मंडी सचिवों से कहा कि उनके अच्छे काम से किसानों के मन में सम्मान की भावना पैदा होनी चाहिए।
यूपी में चीनी की कमी नहीं, 90 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन का दावा
चीनी की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इसकी कोई कमी नहीं है। उनके मुताबिक प्रदेश में एक महीने की कुल खपत करीब 4 लाख टन है, जबकि राज्य के पास 28 लाख टन चीनी का स्टॉक मौजूद है। उन्होंने इस स्टॉक को करीब सात महीने की जरूरत के बराबर बताया। साथ ही कहा कि 15 अक्टूबर से चीनी मिलें शुरू होने पर 90 लाख टन अतिरिक्त चीनी का उत्पादन होगा। योगी ने यूपी की कृषि क्षमता को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि प्रदेश में इतनी क्षमता है कि वह 140 करोड़ देशवासियों का भी पेट भर सकता है।
मुख्यमंत्री योगी के हाथों 24 नवचयनित अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य समारोह में मंच पर 24 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इनमें से प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के 19 व मंडी सचिव पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र मिला।
नाम- तैनाती स्थल
- कनिष्का वर्मा- अयोध्या
- रविप्रकाश सिंह- अयोध्या
- अनीश निषाद- आजमगढ़
- लवकुश यादव- लखीमपुर खीरी
- दिशा सिंह- अयोध्या
- भावना श्रीवास्तव- प्रयागराज
- अमित कुमार मौर्य- गोंडा
- जूही वर्मा- अयोध्या
- अविनाश सिंह- फतेहपुर
- मो. अफरोज- जालौन
- ज्ञानवी तिवारी-गोंडा
- प्रगति सिंह- मीरजापुर
- प्रज्ञा रस्तोगी- मथुरा
- पवनेश कुमार-कौशांबी
- शुभम कुमार-प्रयागराज
- उपासना-गोरखपुर
- मधुमिता सिंह- गोरखपुर
- अक्षिता सिंह-लखनऊ
- ज्योतिका मिश्रा-लखनऊ
मंडी सचिव पद पर नवचयनित पांच अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र
- शिवशंकर चौधरी
- विनोद कुमार
- महिमा मौर्या
- खुशनुमा
- रवि माहौर
यह भी पढ़ें: सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान, अगले 6 महीनों में 1 लाख युवाओं को मिलेंगे सरकारी नियुक्ति पत्र