योगी आदित्यनाथ ने बंगाल में सीमित सभाओं के बावजूद धार्मिक मुद्दों पर जोर दिया, ममता बनर्जी पर हमला बोला, जवाब में ममता ने भी धार्मिक श्लोक पढ़े
कोलकाता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पश्चिम बंगाल में किसी भी गैर बांग्लाभाषी राज्यों, खास कर हिंदीभाषी राज्यो के मुख्यमंत्री की तुलना में कम चुनावी सभा की हो और कम चर्चित रहे हों। योगी आदित्यनाथ बुलडोजर चलाने की बात अधिक चर्चित हुई और उस पर विवाद हुआ। उन्होंने अपनी चुनावी सभाओं में सबसे अधिक धार्मिक, सांस्कृतिक, पारंपरिक गौरव मुद्दों को उठाया और वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति आक्रामक दिखे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी उनके जवाब में अपनी चुनावी सभाओं में काली-दुर्गा के लंबा श्लोक को सुना कर उनको “पंडित” होने की चुनौती देनी पड़ी।
पुराने नेताओं से तुलना
जानकारों कहना है कि बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव अपने समय में पश्चिम बंगाल में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव के वक्त चुनावी सभाओं में आते रहे हैं। लेकिन उन्होंने कुल जितनी चुनावी सभाएं की होंगी, उनकी तुलना में योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभाएं अधिक ही हैं। लालू प्रसाद और मुलायम यादव कोलकाता के आसपास के औद्योगिक इलाकों में हुए चुनावी सभा तक सीमित थे। योगी आदित्यनाथ राज्य के सुदूर कूचबिहार से लेकर कोलकाता के तहत इलाकों में लगातार कई दिनों से भाजपा की चुनावी सभाओं में शिरकत की।
नवद्वीप में धार्मिक संदर्भ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नदिया जिले के नवद्वीप में भाजपा की चुनावी सभा की। नवद्वीप भक्तिकाल के राम-कृष्ण भक्त चैतन्य महाप्रभु के कारण प्रसिद्ध है और मंदिर ही मंदिर है। मुख्यमंत्री योगी ने नवद्वीप की तुलना काशी से की। उनका कहना है कि मां भागीरथी गंगा के तट पर स्थित भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और बंगाल की काशी के रूप में जग विख्यात चैतन्य महाप्रभु की पावन धरा पर आने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने यहां गृहस्थ भक्तों को समझाया कि बंगाल के गौरव को फिर से स्थापित करने के लिए भाजपा सरकार आवश्यक है।
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