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उइगरों के समर्थन में वैश्विक बढ़ा दबाव

चीन के खिलाफ बर्लिन में 'महामंथन': उइगरों पर अत्याचार के 10 साल, अब जवाबदेही तय करने की तैयारी

चीन में उइगर मुस्लिमों और अन्य तुर्क समुदायों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर आवाज एक बार फिर बुलंद हो गई है।

चीन के खिलाफ बर्लिन में महामंथन उइगरों पर अत्याचार के 10 साल अब जवाबदेही तय करने की तैयारी

A Decade of Uyghur Repression, Focus Shifts to Accountability |

बर्लिन (जर्मनी)। चीन में उइगर मुस्लिमों और अन्य तुर्क समुदायों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर आवाज एक बार फिर बुलंद हो गई है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित 'तीसरे अंतरराष्ट्रीय उइगर मंच' (IUF) में दुनिया भर के विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने जुटकर बीजिंग की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का आह्वान किया है। इस तीन दिवसीय महामंथन में उइगरों के उत्पीड़न के 10 साल पूरे होने पर गहरी चिंता जताई गई और चीन की जवाबदेही तय करने के लिए एक सुर में आवाज उठाई गई।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बर्लिन में महामंथन: 11 से 13 जून तक जर्मनी के बर्लिन में 'तीसरे अंतरराष्ट्रीय उइगर मंच' (IUF) का सफल आयोजन किया गया।

बड़ा वैश्विक जमावड़ा: इस तीन दिवसीय मंच में दुनिया के 25 देशों से 200 से अधिक प्रतिनिधियों और 80 से ज्यादा वक्ताओं ने हिस्सा लिया।

खास थीम पर चर्चा: इस बार फोरम का मुख्य विषय "कैंपों के दस साल: मान्यता से जवाबदेही तक - आगे क्या?" रखा गया था।

बर्लिन घोषणापत्र: कार्यक्रम का समापन 'बर्लिन घोषणापत्र' को अपनाने के साथ हुआ, जिसमें उइगरों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।

बीजिंग के बढ़ते प्रभाव और दमन पर 'वर्ल्ड उइगर कांग्रेस' की पैनी नजर

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग जारी कर विदेशों में चीन के बढ़ते प्रभाव, उइगरों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार, उन पर रखी जा रही सख्त निगरानी और उनके दमन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इसी पृष्ठभूमि में वर्ल्ड उइगर कांग्रेस और 'उइगर सेंटर फॉर डेमोक्रेसी एंड ह्यूमन राइट्स' द्वारा संयुक्त रूप से इस अंतरराष्ट्रीय मंच का आयोजन किया गया।

इस तीन दिवसीय मंच में उइगर और अन्य तुर्क समुदायों को प्रभावित करने वाले कई संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें सीमाओं के पार जाकर किए जा रहे दमन (Transnational Repression), बंधुआ मजदूरी, सांस्कृतिक रूप से मिटाने की कोशिशों (Cultural Assimilation) और इन सब के बीच एक्टिविज्म से जुड़े लोगों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक असर पर गंभीर मंथन हुआ।

पूर्व चीनी अधिकारी की गवाही ने चौंकाया, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर उठे सवाल

इस मंच की सबसे बड़ी बात मानवाधिकार चिंताओं को दूर करने में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा रही। कार्यक्रम के दौरान एक पूर्व चीनी अधिकारी ने भी अपनी गवाही दी, जिसने वहां के हालातों की जमीनी हकीकत बयां की। फोरम के अंत में सर्वसम्मति से 'बर्लिन घोषणापत्र' को अपनाया गया। यह घोषणापत्र वैश्विक स्तर पर चीन की जवाबदेही तय करने और उइगर समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए जारी प्रयासों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। (Source: ANI)

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