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जापान में समुद्र के भीतर आया 7.6 तीव्रता का भूकंप

जापान में समुद्र के भीतर आया 7.6 की तीव्रता शक्तिशाली भूकंप

जापान में सोमवार देर रात धरती अचानक इतनी जोर से कांपी कि पूरा उत्तर-पूर्वी तट दहशत में आ गया। समुद्र के भीतर 7.6 की तीव्रता से उठी हलचल ने इमारतों को झकझोर दिया।

जापान में समुद्र के भीतर आया 76 की तीव्रता शक्तिशाली भूकंप

A powerful 7.6 magnitude undersea earthquake struck Japan |

टोक्यो। जापान में सोमवार देर रात धरती अचानक इतनी जोर से कांपी कि पूरा उत्तर-पूर्वी तट दहशत में आ गया। समुद्र के भीतर 7.6 की तीव्रता से उठी हलचल ने न सिर्फ इमारतों को झकझोर दिया, बल्कि 10 फीट तक ऊंची लहरों की चेतावनी के साथ पूरा तटीय इलाका सायरनों से गूंज उठा। रात के अंधेरे में समुद्र की ओर बढ़ते खतरे ने हालात को और गंभीर बना दिया, जबकि प्रशासन ने तुरंत राहत सेवाओं को सक्रिय कर दिया।

लोग घबराहट में घरों से बाहर निकलने पर हुए मजबूर

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, उत्तरी तट से कुछ दूरी पर समुद्र में 7.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसके बाद कई इलाकों में तुरंत सुनामी की ऊंचे स्तर की चेतावनी जारी कर दी गई। भूकंप स्थानीय समय के अनुसार रात 11:15 बजे आया, जब ज्यादातर लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। अचानक आए इस बड़े झटके ने लोगों को घबराहट में घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। जापान जैसे देश में जहां भूकंप अक्सर आते हैं, वहां लोगों की जागरूकता और तैयारी सामान्य है, लेकिन इतनी देर रात आया 7.6 तीव्रता का झटका किसी भी समाज के लिए भय का कारण बन सकता है।

तट से लगभग 70 किलोमीटर दूर समुद्र में था भूकंप का केंद्र

भूकंप का केंद्र जापान के तट से लगभग 70 किलोमीटर दूर समुद्र में, 50 किलोमीटर की गहराई पर था। यह गहराई उस दिशा का संकेत है जिसमें भूकंप समुद्री तहों के धंसने और उठने से उत्पन्न हुआ था। जब समुद्र के अंदर टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधि से इस स्तर के भूकंप आते हैं, तो सुनामी के खतरे कई गुना बढ़ जाते हैं। यही कारण था कि भूकंप के तुरंत बाद JMA ने आओमोरी, इवाते और होक्काइडो प्रान्तों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। एजेंसी ने यह भी बताया कि लहरें 3 मीटर यानी लगभग 10 फीट तक ऊंची हो सकती हैं। रात के अंधेरे में समुद्र से उठती 10 फीट ऊंची लहरों की कल्पना ही भयावह है, और लोगों के लिए यह खतरे का स्पष्ट संकेत था।

सुनामी चेतावनी जारी होते ही बजने लगे सायरन

सुनामी चेतावनी जारी होने के तुरंत बाद इन क्षेत्रों में सायरन बजने लगे। पुलिस, फायर सर्विस और स्व-रक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया। जापान की आपदा प्रबंधन व्यवस्था दुनिया में सबसे उन्नत मानी जाती है, और इसकी झलक इस घटना में भी दिखाई दी। टीवी चैनलों पर लगातार आपातकालीन संदेश चलने लगे, जिनमें लोगों से समुद्र तट से दूर जाने और पहाड़ी या ऊंचे इलाकों में शरण लेने की अपील की जा रही थी। जापान के लोग बचपन से ही आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, इसलिए इस तरह की परिस्थितियों में उनकी प्रतिक्रिया तेज और संगठित होती है।

भूकंप के तुरंत बाद कई क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति हुई बाधित

भूकंप के तुरंत बाद कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। केवल आओमोरी प्रान्त में ही लगभग 2,700 घरों में बिजली गुल हो गई। रात के अंधेरे और ठंड में बिजली गुल होने से लोगों की दिक्कतें और बढ़ गईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, आओमोरी शहर में आग लगने की दो घटनाएं भी सामने आईं, जिनके पीछे शॉर्ट सर्किट या गैस लीकेज जैसी आशंकाओं की जांच की जा रही है। भूकंप के बाद अक्सर विद्युत तारों के क्षतिग्रस्त होने से इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। होक्काइडो और आओमोरी के अलग-अलग इलाकों में जमीन धंसने, सड़कें टूटने और इमारतों में दरारें पड़ने की जानकारी भी प्राप्त हुई।

पूरी तरह टला नहीं है खतरा, रिपल वेव्स भी पहुंचा सकती है नुकसान: सरकार

फिलहाल राहत की बात यह है कि सुनामी की बड़ी चेतावनी बाद में वापस ले ली गई है। JMA ने बताया कि समुद्र में प्रारंभिक हलचल खतरनाक थी, लेकिन बाद में समुद्र की स्थिति स्थिर होने लगी। इसके बावजूद छोटे स्तर की लहरें तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव डाल सकती हैं। सरकार ने कहा है कि खतरा पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि समुद्र में आए बड़े भूकंपों के बाद कभी-कभी देर से आने वाली रिपल वेव्स भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए लोगों से अपील है कि वे फिलहाल तटीय इलाकों में न जाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है जापान

जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यह क्षेत्र चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों—पैसिफ़िक प्लेट, नॉर्थ अमेरिकन प्लेट, फिलिपीन प्लेट और यूरेशियन प्लेट—के मिलन बिंदु पर स्थित है। यह दुनिया के प्रसिद्ध “रिंग ऑफ फायर” का हिस्सा है, जहां धरती के अंदर की हलचलें अन्य जगहों की तुलना में कहीं अधिक होती हैं। यहां हर साल करीब 1500 भूकंप आते हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर छोटे होते हैं, लेकिन हर कुछ महीनों में मध्यम या बड़े भूकंप दर्ज किए जाते हैं। जापान में 2011 का भूकंप और सुनामी इस देश की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक था। तब 9.0 की तीव्रता वाले भूकंप ने सुनामी को जन्म दिया था, जिसमें 18,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

साल 2024 में नोटो द्वीप पर आए भूकंप में करीब 600 लोगों की हुई थी मौत

साल 2024 में भी जापान भूकंप से बड़ी त्रासदी झेल चुका है। नोटो द्वीप पर आए भूकंप में करीब 600 लोगों की मौत हुई थी। जापानी सरकार का अनुमान है कि अगले 30 वर्षों में यहां 75 से 82 फीसदी संभावना है कि एक और बड़े पैमाने का भूकंप आएगा। यदि ऐसा होता है, तो अनुमान है कि लगभग 2.98 लाख लोग मारे जा सकते हैं और 2 ट्रिलियन डॉलर यानी 167 लाख करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह भविष्य की चिंताओं का संकेत है और इसीलिए जापान लगातार आपदा प्रबंधन और भूकंप-रोधी संरचनाओं पर निवेश कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर ‘मेगाथ्रस्ट’ श्रेणी में गिने जाते हैं 7.0 से ऊपर की तीव्रता वाले भूकंप

इस बार के भूकंप की तीव्रता शुरू में 7.6 दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में इसे 7.5 में संशोधित किया गया। आंकड़ों में इस तरह के बदलाव आम हैं, क्योंकि भूकंप मापने वाली प्रणालियां प्रारंभिक झटकों के आधार पर तुरंत अनुमान बनाती हैं, जिसे बाद में परिष्कृत किया जाता है। लेकिन चाहे 7.6 हो या 7.5—यह तीव्रता खुद बताती है कि धरती के अंदर ऊर्जा का विस्फोट कितना बड़ा था। 7.0 से ऊपर की तीव्रता वाले भूकंप को वैश्विक स्तर पर ‘मेगाथ्रस्ट’ श्रेणी में गिना जाता है और ये व्यापक क्षति पहुंचाने में सक्षम होते हैं।

होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों में दिखा इस घटना का सबसे ज्यादा प्रभाव

होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों में इस घटना का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। सड़कों का ढह जाना, जमीन में दरारें पड़ना, इमारतों का हिलना, वाहनों का असंतुलन—इनमें से कई तस्वीरें सोशल मीडिया और स्थानीय टीवी चैनलों पर सामने आई हैं। हालांकि जापान की इमारतें भूकंप-रोधी तकनीक से बनी होती हैं, इसलिए बड़े पैमाने पर ढहने की घटनाएं कम हैं। कुछ लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं—जैसे होक्काइडो में गिरने से दो लोग और आओमोरी में एक व्यक्ति घायल हुआ।

प्रशासन ने बड़े पैमाने पर चलाया बचाव अभियान, अलर्ट पर रखे गए थे हेलीकॉप्टर

घटना का सबसे तनावपूर्ण पहलू यह था कि भूकंप रात में आया। रात के अंधेरे में लोग न सिर्फ डरे हुए होते हैं बल्कि बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। भूकंप के बाद बिजली काटे जाने से हालात और विकट हो जाते हैं। जब समुद्र में 10 फीट तक ऊंची लहरें उठ रही हों और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हों, तब माहौल का तनाव और भय शब्दों में बयां करना मुश्किल है। इसी दौरान प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया। कुछ इलाकों में हेलीकॉप्टरों को भी अलर्ट रखा गया, हालांकि मौसम और रात का समय उड़ानों को सीमित करता है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वे नुकसान का आकलन कर रहे हैं और सुबह तक विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध होगी।

भूकंप का जापानी की अर्थव्यवस्था पर असर

भूकंप के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जापान की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर होगा। जापान दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और किसी भी बड़े भूकंप का असर उद्योगों, सप्लाई चेन, ऊर्जा उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ता है। अगर प्रभावित क्षेत्रों में फैक्ट्रियों, बिजली संयंत्रों या बंदरगाहों को नुकसान पहुंचा है, तो इसका असर व्यापक हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी बड़े औद्योगिक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण हैं।

भूकंप के तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में सक्रिय हुई इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम

जापान की सरकार ने भूकंप के तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम सक्रिय कर दी। राष्ट्रीय प्रसारण नेटवर्क NHK ने तुरंत अपने सभी चैनलों पर ब्रेकिंग अलर्ट जारी किए और स्क्रीन पर सुनामी बचाव गाइडलाइंस दिखानी शुरू कीं—जैसे, ऊंची इमारतों की छतों पर जाना, समुद्र तट से कम से कम 3 किलोमीटर दूर जाना, और भारी वाहन लेकर जोखिम नहीं उठाना। जापान में यह एक नियमित प्रक्रिया है और लोगों को बार-बार जागरूक किया जाता है कि भूकंप के बाद समुद्र के करीब न जाएं।

अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा आफ्टरशॉक्स का आना

विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के भीतर 50 किलोमीटर की गहराई पर आए इस भूकंप का तात्कालिक खतरा तो कम होता जा रहा है, लेकिन आफ्टरशॉक्स यानि झटकों का आना अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। ये आफ्टरशॉक्स कभी-कभी बड़ी तीव्रता वाले भी हो सकते हैं और ढही इमारतों या पहले से क्षतिग्रस्त ढांचों को पूरी तरह गिरा सकते हैं। इसलिए प्रशासन द्वारा जारी सावधानियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

विश्वस्तरीय आपदा प्रबंधन प्रणाली और जनता की जागरूकता ने एक बड़े खतरे को किया नियंत्रित

अगले कुछ घंटों में स्पष्ट होगा कि कुल नुकसान कितना हुआ है और प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्स्थापना में कितना समय लगेगा। अभी तक जो खबरें सामने आई हैं, वे मिलाजुला संकेत देती हैं—कुछ हद तक राहत कि सुनामी का खतरा टल गया है, लेकिन चिंता इस बात की कि भूकंप की तीव्रता बहुत अधिक थी और प्रभाव दीर्घकालिक हो सकता है। कुल मिलाकर, यह घटना यह बताती है कि प्रकृति कितनी शक्तिशाली है और सबसे तैयार राष्ट्र भी आपदाओं से नहीं बच सकते। लेकिन जापान की विश्वस्तरीय आपदा प्रबंधन प्रणाली और जनता की जागरूकता ने इस बार भी एक बड़े खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया है। जैसे-जैसे सुबह होगी, स्थिति और स्पष्ट होगी और नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

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