अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं।
After Midterm Defeat, Trump Softens Stance on Iran, Says 'I Don't Want to Destroy It' |
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के बचे हुए हिस्से को पूरी तरह बर्बाद नहीं करना चाहते, हालांकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ऐसा करना पड़ सकता है। इससे पहले वह ईरान के सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं। गुरुवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध को आगे बढ़ाना है या नहीं, इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "अगर हो सके तो मैं बाकी देश को खत्म नहीं करना चाहूंगा, लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़ेगा। आपको जल्द ही पता चल जाएगा।" ट्रंप ने आगे कहा कि फैसला इस बात को ध्यान में रखकर लिया जाएगा कि क्या ऐसी कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में यह स्थिति दोबारा पैदा न हो। उन्होंने अनुमान जताया कि ईरान को दोबारा खड़ा होने में 25 साल लग सकते हैं।
पहले ईरान के सैन्य ढांचे को खत्म करने की दी थी धमकी
ट्रंप का ताजा बयान उनके पहले के सख्त रुख से अलग माना जा रहा है। इससे पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना ने अभी तक ईरान के बचे हुए हिस्से को निशाना बनाना शुरू नहीं किया है। उन्होंने ईरान के ऊर्जा ढांचे और पुलों को भी संभावित निशाने के तौर पर रखा था। युद्ध के पिछले चरण में उन्होंने कहा था कि अमेरिका के साथ समझौता तभी संभव होगा, जब ईरान के बाकी हिस्से और उसके नेतृत्व को पूरी तरह निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप के ताजा रुख में बदलाव के संकेत 8 अक्टूबर को किए गए उनके उस वादे के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत को फायदेमंद बताया था और मिडटर्म चुनाव से पहले सैन्य कार्रवाई से इनकार किया था। उन्होंने उस समय कहा था, "हम 3 नवंबर को अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला नहीं करेंगे।" हालांकि, अब मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका यह वादा लागू नहीं रह गया है। इससे पहले की रिपोर्टों में भी ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म करने को लेकर ट्रंप की हिचकिचाहट का जिक्र किया गया था। इसकी एक वजह युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण में लगने वाला लंबा समय बताया गया था।
युद्ध से अमेरिका में भी बढ़ा राजनीतिक दबाव
ईरान के साथ जारी युद्ध का असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। युद्ध के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ी हुई हैं और चुनाव के नजदीक आने के साथ सरकार की सार्वजनिक अप्रूवल रेटिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका आगे सैन्य हमले जारी रखता है या बातचीत के जरिए समझौते की कोशिश करता है, इससे युद्ध की आगे की दिशा तय होगी। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
ANI
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