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PoK में कार्रवाई पर अल्ताफ हुसैन की चेतावनी

Pakistan: PoK में दमन पर अल्ताफ़ हुसैन की दो टूक- 'आग पूरे मुल्क को स्वाहा कर देगी'

पाक अधिकृत कश्मीर में बुनियादी हक और बेलगाम महंगाई को लेकर सड़कों पर उतरे कश्मीरी लोगों पर पाकिस्तानी फौज और अर्धसैनिक बलों की बर्बर कार्रवाई से माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।

pakistan pok में दमन पर अल्ताफ़ हुसैन की दो टूक- आग पूरे मुल्क को स्वाहा कर देगी

Altaf Hussain warns Pakistan over PoK crackdown |

लंदन (यूके)। 'कश्मीर में जुल्म और फौजी ताकत का इस्तेमाल फौरन बंद करो, वर्ना पाकिस्तान का वजूद ही खत्म हो जाएगा।' मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक अल्ताफ़ हुसैन ने पाकिस्तान सरकार को यह बेहद तीखी चेतावनी दी है। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में बुनियादी हक और बेलगाम महंगाई को लेकर सड़कों पर उतरे कश्मीरी अवाम पर पाकिस्तानी फौज और अर्धसैनिक बलों की बर्बर कार्रवाई से माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक के जरिए दुनिया भर के कार्यकर्ताओं और आम जनता को संबोधित करते हुए अल्ताफ़ हुसैन ने साफ कहा कि PoK में सुलग रही यह आग सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देखते ही देखते पूरे पाकिस्तान को अपनी चपेट में ले लेगी।

अल्ताफ़ हुसैन ने सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कश्मीरियों के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने दावा किया कि रावलाकोट समेत PoK के कई इलाकों से स्थानीय लोगों ने उनसे संपर्क कर पाकिस्तानी फौज की ज्यादतियों की दास्तान बयां की है। MQM प्रमुख ने कहा कि इस खित्ते के लोग पिछले 80 सालों से सिर्फ नाइंसाफी झेल रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि कश्मीर के भविष्य का फैसला खुद वहां के बाशिंदे ही करें। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा, "सैद्धांतिक रूप से कश्मीर सिर्फ कश्मीरियों का है। अब वहां की आवाम का यह सर्वसम्मत फैसला है कि वे अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगे।"

पाकिस्तानी हुकूमत के दावों की हवा निकालते हुए अल्ताफ़ हुसैन ने एक बड़ा संवैधानिक पहलू भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि कानूनी और संवैधानिक तौर पर 'आजाद जम्मू और कश्मीर' कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा रहा ही नहीं है। इस्लामाबाद ने इसके अलग संवैधानिक दर्जे को ताक पर रखकर जबरन इस इलाके पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि खुद पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह माना है कि आजाद कश्मीर उसका हिस्सा नहीं है। अगर ऐसा होता, तो पाकिस्तान में चार के बजाय पांच सूबे (प्रांत) होते। ऐसे में जो लोग कश्मीर के पाकिस्तान में विलय का दावा करते हैं, वे पूरी तरह झूठ बोल रहे हैं।

इंटरनेट बंद और कर्फ्यू से हालात बेकाबू

PoK की जमीनी हकीकत बयां करते हुए अल्ताफ़ हुसैन ने पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कोर (FC) की तैनाती पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर की जा रही कार्रवाई की तुलना 'यजीदी जुल्म' से की। रावलाकोट जैसी जगहों से आ रही खबरों के हवाले से उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाई गईं, जिससे कई मौतें हुई हैं। सच को दबाने के लिए इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गई हैं, कर्फ्यू लगा दिया गया है और लोगों के आने-जाने पर पाबंदी है।

अल्ताफ़ हुसैन ने कहा, "मैं और मेरी पार्टी कश्मीरियों पर ढाए जा रहे इस कहर की पुरजोर विरोध करते हैं। हम उनकी सभी जायज मांगों के साथ खड़े हैं। आखिर हक मांगने वालों को ताकत के बल पर कुचलकर इस मुल्क को किस दिशा में ले जाया जा रहा है?" उन्होंने चेतावनी दी कि इसी तरह की दमनकारी नीतियों के कारण बलूचिस्तान के कई हिस्सों पर से सरकार का नियंत्रण खत्म हो चुका है। कबायली इलाकों में चले फौजी ऑपरेशनों ने लाखों स्थानीय लोगों को बेघर (IDP) बना दिया, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में लगातार हो रहे ड्रोन हमलों और बमबारी ने जनता के भीतर भारी आक्रोश भर दिया है।

पाकिस्तानी नेतृत्व से सीधे अपील करते हुए MQM नेता ने कहा, "खुदा के लिए अपने ही देश के लोगों पर यह जुल्म बंद करो और पाकिस्तान पर रहम खाओ। नाइंसाफी और तानाशाही की वजह से यह मुल्क पहले ही दो टुकड़ों में बंट चुका है (1971 में बांग्लादेश का बनना)। बचे हुए पाकिस्तान के साथ अतीत की उन खौफनाक गलतियों को दोबारा मत दोहराओ।"

क्यों सुलग रहा है पाक अधिकृत कश्मीर?

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से PoK में हालात बेकाबू हैं। खराब गवर्नेंस, चरमराती अर्थव्यवस्था और विधानसभा में आरक्षित सीटों के बंटवारे को लेकर आम जनता सड़कों पर है। आसमान छूती महंगाई, बिजली के भारी-भरकम बिलों और आटे-दाल जैसी बुनियादी चीजों की किल्लत ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जब जनता ने शांतिपूर्ण विरोध शुरू किया, तो पाकिस्तानी प्रशासन ने अर्धसैनिक बलों को झोंक दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलाकोट और अन्य इलाकों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोग मारे जा चुके हैं और दर्जनों घायल हैं। इस खूनी दमन के बाद अब पाकिस्तान के भीतर से ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठने लगी है। (ANI)

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