एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बलूच कार्यकर्ता जियांद बलूच के कथित जबरन गायब होने पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान से जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
लंदन: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बलूच कार्यकर्ता जियांद बलूच के जबरन लापता होने के मामले में पाकिस्तान की कड़ी निंदा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बलूच लोगों के साथ ऐतिहासिक रूप से भेदभाव किया जाता रहा है और उन्हें पाकिस्तान में हाशिए पर रखा गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक बयान में ये विवरण शेयर किया।
बलूचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों के मुद्दे पर रहे हैं सक्रिय
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि जियांद बलूचिस्तान प्रांत में छात्रों के अधिकारों के लिए अभियान चलाने वाले छात्र संगठन बलूच छात्र संगठन (बीएसओ) के अध्यक्ष हैं और बलूचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों के मुद्दे पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों के साथ मिलकर उनकी वापसी के लिए अभियान चलाया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि 29 वर्षीय कार्यकर्ता, जिनके दो बच्चे हैं- एक दो साल की बेटी और एक तीन साल का बेटा, को 24 जुलाई 2026 को लगभग 1 बजे बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा स्थित उनके घर से जबरन गायब कर दिया गया था।
घर की तलाशी शुरू कर दी और तोड़फोड़ की
कानून प्रवर्तन अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों ने लगभग आधी रात को उनके घर दस्तक दी, जब जियांद घर पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनके माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे मौजूद थे। उनकी पत्नी के अनुसार, कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में पहचान बताने वाले दस लोग और सादे कपड़ों में चार लोग जबरन उनके घर में घुस गए। जियांद के घर पर न होने का पता चलने पर उन्होंने घर की तलाशी शुरू कर दी और तोड़फोड़ की।
जियांद के पिता पर किया गया शारीरिक हमला
परिवार ने यह भी बताया कि उन लोगों ने जियांद के पिता पर शारीरिक हमला किया और उनकी पत्नी और मां को ले जाने की धमकी दी। जब जियांद घर पहुंचे, तो उन्हें घर के गेट से तुरंत उठा लिया गया। उन्हें ले जाने का कोई कारण नहीं बताया गया और न ही यह जानकारी दी गई कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। पुलिस ने उनके लापता होने के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने से इनकार कर दिया है।
अतीत में जियांद को उनकी सक्रियता के कारण बनाया गया निशाना
इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि अतीत में जियांद को उनकी सक्रियता के कारण निशाना बनाया गया है। बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि बलूच लोगों के साथ पाकिस्तान में ऐतिहासिक रूप से भेदभाव और उन्हें हाशिए पर रखा गया है, वहीं 2025 के बाद से बलूच कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप बलूचिस्तान प्रांत और उसके बाहर जबरन लापता किए जाने और मनमानी गिरफ्तारियां हो रही हैं।
(इनपुट: ANI)
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