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CIA छापे पर विवाद, तुलसी गैबार्ड ने नकारा

CIA छापे की खबर पर विवाद, तुलसी गैबार्ड के कार्यालय पर कार्रवाई से इनकार

वाशिंगटन डीसी में सत्ता प्रतिष्ठान को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। इस बारे में ‘फॉक्स न्यूज’ ने खबर दी है कि सीआईए ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड के कार्यालय पर छापा मारा है।

cia छापे की खबर पर विवाद तुलसी गैबार्ड के कार्यालय पर कार्रवाई से इनकार

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वाशिंगटन। वाशिंगटन डीसी में सत्ता प्रतिष्ठान को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। इस बारे में ‘फॉक्स न्यूज’ ने खबर दी है कि सीआईए ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड के कार्यालय पर छापा मारा है।

जेएफके और एमके-अल्ट्रा फाइलों का दावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआईए एजेंट दर्जनों बक्से बाहर ले गए, जिनमें कथित तौर पर जेएफके हत्याकांड और एमकेयूएलट्रा (सीआईए का माइंड कंट्रोल ऑपरेशन) से संबंधित फाइलें थीं। दावा किया गया कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया चल रही थी।

एनआईए प्रमुख कार्यालय ने खबर को बताया गलत

हालांकि, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की प्रेस सचिव ओलिविया कोलमैन ने ‘फॉक्स न्यूज’ की छापेमारी संबंधी खबर को गलत बताया। कोलमैन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “यह गलत है, सीआईए ने डीएनआई के कार्यालय पर छापा नहीं मारा।”

अन्ना पॉलिना लूना ने दी समन की चेतावनी

इस बीच, प्रतिनिधि अन्ना पॉलिना लूना ने कहा कि अगर सीआईए राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय से कथित तौर पर जब्त की गई फाइलों के बक्से वापस नहीं करती है, तो वह सीआईए को समन जारी करेंगी। लूना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि सीआईए के पास डीएनआई तुलसी गैबार्ड को फाइलें लौटाने के लिए 24 घंटे का समय है, अन्यथा वह समन जारी करेंगी, क्योंकि कांग्रेस ने उन रिकॉर्डों के लिए अनुरोध किया है।

जेएफके और एमके-अल्ट्रा दस्तावेजों पर उठे सवाल

लूना ने ‘न्यूजनेशन’ से कहा, “यह चिंताजनक इसलिए है क्योंकि राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर जेएफके से संबंधित दस्तावेजों को पूरी तरह सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। वहीं, एमके-अल्ट्रा फाइलों को लेकर सीआईए पहले ही कह चुकी है कि सभी दस्तावेज जारी कर दिए गए हैं और बाकी दस्तावेज नष्ट कर दिए गए।”

दस्तावेज लौटाने की मांग

लूना ने आगे कहा, “दस्तावेजों की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए हम एक संरक्षण नोटिस भेज रहे हैं। दस्तावेजों को ओडीएनआई को लौटाना होगा, क्योंकि राष्ट्रपति ने ओडीएनआई को आरएफके, एमएलके और जेएफके से जुड़े दस्तावेजों को अवर्गीकृत करने का निर्देश और अधिकार दिया था।”

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