न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 26 जनवरी। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा है कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया, जबकि यूरोपीय देश इसी भारत के साथ व्यापार समझौता करने जा रहे हैं।
‘युद्ध’ को खुद ही वित्तपोषित कर रहा यूरोप
अमेरिकी वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि यूरोप भारत से रिफाइन किया हुआ रूसी तेल खरीदकर अपने ही खिलाफ “युद्ध” को वित्तपोषित कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूस से तेल भारत में जाता है, वहां रिफाइन होता है और उसके बाद यूरोपीय देश उस रिफाइन उत्पाद को खरीदते हैं।
ट्रंप के नेतृत्व में समाधान का दावा
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त कराने के लिए बातचीत शुरू की है। उनका कहना था कि अमेरिका ने इस संघर्ष में यूरोपीय देशों की तुलना में कहीं अधिक बलिदान दिए हैं।
भारत पर लगाए गए शुल्क का जिक्र
रविवार को एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इसके बावजूद यूरोपीय देशों ने भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है।
कुल 50 प्रतिशत शुल्क का फैसला
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से तेल की खरीद को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता
भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता के पूरा होने और इसे अंतिम रूप दिए जाने की घोषणा करने वाले हैं। इन वार्ताओं की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी।
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