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मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद अप्रैल में जीएसटी...

मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद अप्रैल में जीएसटी संग्रह में 8.7 फीसदी का उछाल

America – Iran : मिडिल ईस्ट में अमेरिका - ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति चेन बाधित होने...

मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद अप्रैल में जीएसटी संग्रह में 87 फीसदी का उछाल

मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद अप्रैल में जीएसटी संग्रह में 8.7 फीसदी का उछाल |

America – Iran : मिडिल ईस्ट में अमेरिका - ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति चेन बाधित होने के बावजूद भारत के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन में उछाल आया है। देश में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.7 फीसदी बढ़कर 2.43 लाख करोड़ (सटीक: ₹2,42,702 करोड़) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

केन्द्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में जीएसटी का कुल आंकड़ा लगातार दूसरे अप्रैल में 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया और मार्च 2026 के 2,00,064 करोड़ रुपये के आंकड़े से बेहतर रहा। अप्रैल 2025 में जीएसटी से प्राप्त कुल राशि 2,23,265 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। इस दौरान शुद्ध जीएसटी राजस्व 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.3 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि आयात राजस्व में वृद्धि के कारण हुई है।

महाराष्ट्र जीएसटी संग्रह के मामले में देश में शीर्ष पर रहा। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र ने 22,929 करोड़ रुपये के GST राजस्व के साथ राज्यों में सबसे अधिक योगदान दिया है। इसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश रहा। अप्रैल 2026 में उत्तर प्रदेश का जीएसटी (GST) संग्रह 10,178 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 40% की वृद्धि दर्शाता है। इसके बाद कर्नाटक (9,958), गुजरात (9,916) और तमिलनाडु (8,413) क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर रहे।

रिफंड की गणना के बाद, शुद्ध जीएसटी संग्रह 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.3% अधिक है। इस माह में रिफंड का वितरण पिछले वर्ष की तुलना में 19.3% बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये हो गया है।

देश में जीएसटी संग्रह में उछाल के कारणों पर नजर डालें तो घरेलू अर्थव्यवस्था की एक अलग कहानी सामने आती है। इस बार रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह का कारण घरेलू खपत नहीं, बल्कि महंगे आयात से प्राप्त राजस्व है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में महंगे दाम पर आयातित वस्तुओं पर प्राप्त जीएसटी राजस्व 25.8 फीसदी बढ़कर 57,580 करोड़ पहुंच गया। इसके मुकाबले घरेलू लेनदेन से राजस्व सिर्फ 4.3 फीसदी बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। यानी रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह के पीछे घरेलू बाजार की मांग से ज्यादा भूमिका महंगे आयात की रही।

दरअसल, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, उर्वरक और कई कमोडिटी की कीमतें ऊपर हैं। युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला में अड़चनों ने आयात लागत बढ़ा दी है। जब आयात महंगा होता है, तो उस पर लगने वाला कर संग्रह भी बढ़ता है। यही वजह है कि आयात जीएसटी में तेज उछाल दिखा। और यही पक्ष अर्थशास्त्रियों की चिंता का कारण भी है। अगर जीएसटी संग्रह बढ़ा है, लेकिन घरेलू लेनदेन की रफ्तार कमजोर है तो इसका मतलब है कि खपत उतनी मजबूत नहीं है, जितनी जीएसटी का आंकड़ा दिखा रहा है।

आम उपभोक्ता गैर-जरूरी खर्चों में सावधानी बरत रहा है। महंगाई और अनिश्चितता के बीच घरेलू मांग पूरी ताकत से नहीं लौट पा रही। यह आंकड़ा घरेलू विनिर्माण एवं मेक इन इंडिया को और मजबूत करने की जरूरत भी बताता है।

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