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ईरान में स्कूली छात्राओं की मौत पर उबाल

ईरान में स्कूली छात्राओं की मौत पर उबाल, US-इज़राइल हमलों के बाद बढ़ा युद्ध का खतरा

ईरान में शनिवार को US-इज़राइली हमलों में 150 से अधिक स्कूली छात्राओं के मारे जाने के बाद हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

ईरान में स्कूली छात्राओं की मौत पर उबाल us-इज़राइल हमलों के बाद बढ़ा युद्ध का खतरा

Iran Erupts in Protests After Deadly US-Israeli Strikes on Schoolgirls |

मिनाब (ईरान)। ईरान में शनिवार को US-इज़राइली हमलों में 150 से अधिक स्कूली छात्राओं के मारे जाने के बाद हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी द्वारा मंगलवार को शेयर किए गए विज़ुअल्स में लोगों का एक हुजूम दिख रहा है, जो मिसाइल हमले में मारे गए बेगुनाह युवा छात्राओं की हत्या का विरोध कर रहे हैं।

छात्राओं की मौत पर सड़कों पर उमड़ा गुस्सा

सरकारी मीडिया ने एक और पोस्ट में यह भी कहा कि, "शनिवार को अमेरिका और इज़राइल द्वारा मारी गई 165 से अधिक बेगुनाह ईरानी स्कूली छात्राओं के अंतिम संस्कार में भारी भीड़ शामिल हो रही है।" UN न्यूज़ के मुताबिक, ईरान में US-इज़राइली हमलों में देश के होर्मोज़गान प्रांत के मिनाब गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर हमला होने के बाद मरने वालों की संख्या अब लगभग 150 हो गई है, और लगभग 100 घायल हैं।

UNESCO ने जताई चिंता, शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में, UNESCO ने सैन्य हमलों के असर पर गहरी चिंता जताई और कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत सुरक्षा मिलती है, और "शैक्षणिक संस्थानों पर हमले छात्र और शिक्षकों को खतरे में डालते हैं और पढ़ाई के अधिकार को कमज़ोर करते हैं।"

ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन’ से बढ़ी क्षेत्रीय जंग

बड़े पैमाने पर ये विरोध प्रदर्शन तब हुए जब 28 फरवरी को शुरू हुए एक बड़े "मिलिट्री हमले" के बाद पश्चिमी एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बड़े पैमाने पर लड़ाई शुरू हो गई। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन नाम के इस कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन में, US और इज़राइली सेनाओं ने ईरान में बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए, जिसमें खास मिलिट्री साइट्स, न्यूक्लियर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और लीडरशिप कंपाउंड्स को निशाना बनाया गया।

ट्रंप का बचाव, कहा- अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए कार्रवाई

इसी बीच, फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों के बारे में कांग्रेस को एक आधिकारिक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि ये हमले 28 फरवरी को उनके कहने पर अमेरिका के हितों की रक्षा, होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए समुद्री व्यापार का फ्री फ्लो सुनिश्चित करने और सहयोगी देशों समेत क्षेत्रीय सहयोगियों की सामूहिक अत्मरक्षा के लिए किए गए थे। ट्रंप ने आगे कहा कि इन हमलों में ज़मीनी सेना का इस्तेमाल नहीं किया गया था, और मिशन को इस तरह से प्लान और पूरा किया गया था कि आम लोगों की मौत कम से कम हो, भविष्य के हमलों को रोका जा सके और ईरान की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को बेअसर किया जा सके।

ईरान की जवाबी कार्रवाई, पूरे क्षेत्र में बढ़ा तनाव

जवाब में, ईरान ने पूरे इलाके में अमेरिकी ठिकानों और इज़राइल, बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे सहयोगी देशों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन लॉन्च कर जवाबी कार्रवाई की। बड़े इलाके में लड़ाई का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में दुनिया भर के नेता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अभी तनाव कम करने की अपील कर रही हैं। हालांकि लड़ाई अभी भी जारी है और इसका कोई साफ अंत नहीं दिख रहा है।

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