ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर ईरानी विदेश मंत्री ने एनडीबी सदस्यता की पुष्टि की। पीएम मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय शांति पर की चर्चा। पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली। ईरान ने ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की सदस्यता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि तेहरान इस दिशा में काम कर रहा है और कई देशों ने इसे लेकर सकारात्मक समर्थन भी जताया है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 'एसएनएन ईरान' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय मुलाकात को "बेहद मजबूत और सकारात्मक बैठक" करार दिया।
मोदी और पेजेश्कियन की बैठक रही बेहद सकारात्मक
अरागची ने उल्लेख किया कि सम्मेलन से पहले बने कमर्शियल काउंसिल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी और डॉ. मसूद पेजेश्कियन के बीच स्थानीय एवं राष्ट्रीय मुद्राओं के आपसी व्यापार में इस्तेमाल को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस चर्चा ने वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर कूटनीतिक ध्यान आकर्षित किया है। शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्र के साथ ही ईरानी राष्ट्रपति ने कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। अरागची के अनुसार, भारत के अलावा मलेशिया और अफ्रीका के प्रमुख देश इथियोपिया के प्रधानमंत्री के साथ भी क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। तेहरान का मानना है कि इस्लामिक और क्षेत्रीय देशों के साथ उसके कूटनीतिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
NDB में शामिल होने को लेकर तेहरान सक्रिय
NDB की सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर अरागची ने कहा, "हम आज इस पर काम कर रहे हैं और कुछ देश इसके समर्थन में हैं, जो आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया में हैं।" पिछले महीने ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती ने भी ईरान के NDB में शामिल होने की मंशा जताई थी। दूसरी ओर, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ अपनी बैठक के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को खून-खराबे और अस्थिरता का मुख्य कारक बताया। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को और अधिक बढ़ाने की पुरजोर वकालत की।
मध्य पूर्व की सुरक्षा पर ईरान का दो टूक रुख
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने दो टूक कहा कि इस क्षेत्र को किसी बाहरी पुलिसमैन की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्य पूर्व की सुरक्षा केवल क्षेत्र के अपने देशों की मिली-जुली पहलों से ही सुनिश्चित की जा सकती है। पेजेश्कियन ने यह भी दोहराया कि ईरान एक शांतिप्रिय देश है और वह मुस्लिम तथा पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को अधिक तार्किक और मजबूत बनाएगा। इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात की थी, जो बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई वार्ताओं का ही विस्तार थी।
भारत-ईरान संबंधों पर हुई उच्च-स्तरीय चर्चा
विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों के तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद ब्रिक्स बैठकों में ईरान के नियमित और उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व के लिए तेहरान का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियन को धन्यवाद दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहनशीलता, नवाचार, आपसी सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने की मजबूत क्षमता रखता है।
कूटनीति और संवाद से ही समाधान संभव
दोनों शीर्ष नेताओं ने पश्चिमी एशिया के मौजूदा संघर्ष पर भी अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के इस निरंतर रुख को फिर से दोहराया कि सभी विवादों का समाधान केवल कूटनीति और संवाद के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने, नेविगेशन व वाणिज्य की स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा नाविकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बिश्केक से दिल्ली तक जारी रही सार्थक बातचीत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में पीएम मोदी ने इस मुलाकात को बिश्केक की उत्पादक चर्चाओं की अगली कड़ी बताया। पीएम ने लिखा, "बिश्केक से लेकर दिल्ली तक, उत्पादक चर्चाएं जारी हैं। ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से मिलकर बहुत खुशी हुई। यह यात्रा और भी खास है क्योंकि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है।" प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हमने भारत-ईरान की दोस्ती पर चर्चा की। हमारा मानना है कि हमें दीर्घकालिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए। क्षेत्र के मौजूदा हालात पर भी चर्चा हुई। भारत स्थायी शांति की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है।"
ब्रिक्स मंच पर ईरान की सक्रिय सहभागिता
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने ब्रिक्स में ईरान की सहभागिता पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सहित अन्य बहुपक्षीय संगठनों में पारस्परिक हितों के मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच चल रहे निरंतर सहयोग की सराहना की। उल्लेखनीय है कि ईरान, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ जनवरी 2024 से ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बन चुका है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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