ईरान और संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था IAEA के बीच परमाणु ठिकानों की जांच को लेकर तल्खी चरम पर पहुंच गई है।
तेहरान (ईरान)। ईरान और संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था IAEA के बीच परमाणु ठिकानों की जांच को लेकर तल्खी चरम पर पहुंच गई है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने आईएईए (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जल्द ही ईरानी परमाणु संवर्धन केंद्रों का दौरा करने की बात कही थी। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका के साथ अंतिम समझौता नहीं हो जाता और सभी प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटा लिए जाते, तब तक उसके परमाणु ठिकानों की जांच मुमकिन नहीं है।
प्रतिबंध हटने के बाद ही मिलेगी एंट्री: ईरान
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राफेल ग्रॉसी के बयानों का जवाब देते हुए तेहरान का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा, "ग्रॉसी के अनुरोध के बावजूद स्विट्जरलैंड में उनके साथ कोई बैठक नहीं हुई। ना ही उन ठिकानों या परमाणु सामग्री तक पहुंच की कोई योजना है जिन पर हमला किया गया था।"
गरीबाबादी ने आगे जोर देकर कहा कि प्रभावित परमाणु केंद्रों और सामग्रियों के निरीक्षण की अनुमति देने पर केवल वाशिंगटन के साथ एक अंतिम समझौते के दायरे में ही विचार किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "इन मुद्दों की समीक्षा और निर्णय तभी होगा जब दूसरा पक्ष सभी प्रतिबंधों और अन्य उपायों को समाप्त करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएगा। आप मीडिया हाइप के जरिए 'भड़काओ और कब्जा करो' की नीति को आगे नहीं बढ़ा सकते।"
आईएईए चीफ ने याद दिलाया समझौता, कहा- 'जांच तो होकर रहेगी'
इससे पहले, आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने जापान के सुनामी प्रभावित फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षक जल्द ही ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्रों का दौरा करेंगे। उन्होंने ईरान के राजनीतिक बयानों पर पलटवार करते हुए कहा, "मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे हकीकत का हिस्सा हैं। लेकिन मैं याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।"
ग्रॉसी ने कहा कि इस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री सुविधाओं के संबंध में की जाने वाली परमाणु गतिविधियों की निगरानी आईएईए द्वारा की जाएगी। उन्होंने आगे कहा, "जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा। चाहे यह परसों हो, एक हफ्ते में हो या 10 दिनों में- समयसीमा महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन यह मुख्य बात नहीं है। मुख्य बात यह है कि निरीक्षण हर हाल में होकर रहेगा।" दरअसल, प्रस्तावित राजनयिक ढांचे के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि ईरान को अपने यूरेनियम भंडार को अत्यधिक संवर्धित (Highly Enriched) स्तर से घटाकर 'डाउनब्लेंड' (कम समृद्ध या पतला) करना होगा। आईएईए (IAEA) प्रमुख ग्रॉसी का यह बयान संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी की ओर से अब तक का सबसे सख्त रुख माना जा रहा है, क्योंकि तेहरान के परमाणु भंडार की वास्तविक स्थिति को सत्यापित करने में इस एजेंसी की भूमिका बेहद निर्णायक है।"
परमाणु हथियारों की आशंका और पुराना विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद तेहरान के परमाणु भंडार के सत्यापन से जुड़ा है जो लंबे समय से अधर में लटका है। साल 2025 में इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए 12 दिनों के सैन्य संघर्ष के बाद से तेहरान ने आईएईए को अपने संवर्धन स्थलों तक पहुंचने से रोक दिया है।
आशंका जताई जा रही है कि इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) के पास उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का इतना पर्याप्त भंडार है, जिससे वो सैद्धांतिक रूप से 10 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है। हालांकि, तेहरान हमेशा से यह कहता आया है कि उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाएं पूरी तरह से शांतिपूर्ण हैं, लेकिन वह वैश्विक स्तर पर एकमात्र ऐसा देश है जो बिना किसी घोषित सैन्य हथियार कार्यक्रम के यूरेनियम को 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित कर रहा है। फिलहाल ग्रॉसी ने इस स्थिति को दोनों पक्षों के बीच महज एक "शब्दों का युद्ध" करार दिया है। परमाणु ठिकानों की जांच के इस ताजा विवाद के बीच, मंगलवार को ही वाशिंगटन (अमेरिका) और तेहरान दोनों ओर से इस निरीक्षण की समयसीमा और इसके दायरे को लेकर बेहद विरोधाभासी और टकराव भरे बयान सामने आए हैं, जिसने कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। (Source: ANI)
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