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इजरायल में सत्ता बदलाव की तैयारी तेज

इजरायल में सत्ता परिवर्तन की तैयारी तेज, आइजेनकोत ने नेतन्याहू की नीतियां पलटने का लिया संकल्प

इजराइल में विपक्षी यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोत ने नई नेसेट के संसदीय बहुमत का तुरंत इस्तेमाल करने का संकल्प लिया है।

इजरायल में सत्ता परिवर्तन की तैयारी तेज आइजेनकोत ने नेतन्याहू की नीतियां पलटने का लिया संकल्प

Israel Power Shift Looms, Netanyahu Faces Challenge |

यरूशलम [इजराइल]: इजराइल में विपक्षी यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोत ने नई नेसेट के संसदीय बहुमत का तुरंत इस्तेमाल करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ निर्णायक रूप से मतदान किया है। आइजेनकोत ने एक औपचारिक घोषणा में कहा कि आंकड़ों को किसी भी तरह से देखा जाए, इजराइल के बहुसंख्यक नागरिकों ने आधे मिलियन से अधिक वोटों के अंतर से 7 अक्टूबर की सरकार और सैन्य भर्ती से बचने की नीति के खिलाफ मतदान किया है। उन्होंने बदलाव के पक्ष में मिले जनादेश को लागू करने की बात कही।

जांच आयोग बनाने और न्यायिक सुधार खत्म करने का संकल्प

आइजेनकोत ने हमास के नेतृत्व वाले हमले के दौरान हुई सुरक्षा चूकों की जांच के लिए राज्य जांच आयोग गठित करने, सार्वभौमिक अनिवार्य सैन्य भर्ती लागू करने और निवर्तमान कैबिनेट द्वारा लागू किए गए न्यायिक पुनर्गठन के उपायों को खत्म करने के लिए तेजी से कानून लाने का संकल्प लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को भी गुमराह नहीं होना चाहिए। इजराइल में नेसेट ही वह संस्था है, जो सरकार को अपना विश्वास देती है, न कि सरकार नेसेट को। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी नतीजे स्पष्ट हैं, भले ही कुछ लोग उन पर संदेह पैदा करने की कोशिश कर रहे हों।

नेतन्याहू के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाने के बीच आया बयान

आइजेनकोत की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके राजनीतिक सहयोगियों ने बहुमत खोने के बाद विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए मंगलवार के चुनावी आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, ऐसी रिपोर्टों के बीच कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहने के लिए ईरान के साथ युद्ध शुरू कर सकते हैं, आइजेनकोत ने चेतावनी दी कि नई सरकार के कार्यभार संभालने तक वह केवल उन्हीं सैन्य अभियानों का समर्थन करेंगे, जिनमें इजराइल के खिलाफ प्रत्यक्ष और तत्काल खतरा हो और जिनके लिए इंतजार करना संभव न हो। आइजेनकोत ने व्यापक प्रतिनिधित्व वाली और राजनेताओं की भागीदारी वाली सरकार बनाने का अपना लक्ष्य भी दोहराया। उन्होंने कहा कि कोई भी सांसद, जो उनकी बुनियादी शर्तों का समर्थन करने के लिए तैयार है, संभावित गठबंधन सहयोगी हो सकता है। उन्होंने एक और चुनाव और लंबे समय तक चलने वाले राजनीतिक गतिरोध को रोकने के लिए असाधारण प्रयास करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का प्रस्ताव भी चर्चा में

चल रहे राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के संभावित रास्तों पर विपक्षी गुट के भीतर की पार्टियां प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव की व्यवस्था शुरू करने से जुड़े कानून पर विचार कर रही हैं। द टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, इससे अरब गुट के समर्थन पर निर्भर हुए बिना अल्पमत सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है। इस प्रस्ताव के तहत मतदाता व्यापक गठबंधन से अलग सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव करेंगे। इससे मंगलवार के अनिर्णायक मतदान के बाद पैदा हुए विधायी गतिरोध को दूर करने में मदद मिल सकती है। मौजूदा चुनाव में 120 सदस्यीय नेसेट में किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। मार्च 2021 के गतिरोध वाले चुनावों के बाद नेतन्याहू भी इसी तरह की व्यवस्था का प्रस्ताव रख चुके हैं। हालांकि, इस प्रणाली को लागू करने के लिए इजराइल के अर्ध-संवैधानिक बेसिक लॉ: द गवर्नमेंट में संशोधन करना होगा। इसके लिए कम से कम 61 सांसदों की सहमति जरूरी है। मौजूदा कानून के तहत किसी भी संभावित सरकार को कार्यभार संभालने से पहले नेसेट में विश्वास मत हासिल करना अनिवार्य है।

तेल अवीव और यरुशलम में प्रदर्शन की तैयारी

इन राजनीतिक गतिविधियों के बीच शनिवार शाम को पूरे इजराइल में नागरिक समाज के प्रदर्शन आयोजित किए जाने हैं। स्टैंडिंग टूगेदर मूवमेंट के आयोजकों ने तेल अवीव के हबीमा स्क्वायर और यरुशलम के पेरिस स्क्वायर में शाम 7:30 बजे सार्वजनिक रैलियों की घोषणा की है। इसके अलावा बीर्शेबा, हाइफा और तायिब में भी सभाएं आयोजित की जाएंगी। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य विपक्षी नेतृत्व से चुनाव में मिले जनादेश को स्वीकार करने और यहूदी-अरब सहयोग पर आधारित शासन व्यवस्था की वकालत करना है।

विपक्ष को मिलीं 67 सीटें, लेकिन गठबंधन की राह आसान नहीं

मंगलवार के मतदान में विपक्षी दलों को 67 सीटें मिलीं, जबकि नेतन्याहू के पक्ष वाले दलों को 53 सीटें हासिल हुईं। हालांकि, विपक्ष की 67 सीटों में से 48 सीटें जायोनी गुटों के पास हैं, जबकि 19 सीटें अरब गैर-जायोनी पार्टियों ने हासिल की हैं। यह स्थिति नेतन्याहू विरोधी नेताओं के सामने गठबंधन बनाने की चुनौती पेश करती है। प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और इस जनादेश को यहूदी-अरब साझेदारी पर आधारित सरकार में दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब साझेदारी से पीछे हटने का नहीं, बल्कि उसे राजनीतिक ताकत में बदलने का समय है। अरब नागरिकों के वोटों का मूल्य यहूदी नागरिकों के वोटों के बराबर है और देश का भविष्य तय करने में उनकी भी पूरी भागीदारी होनी चाहिए।

4 नवंबर को राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे अंतिम चुनावी नतीजे

राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। इस बीच, संभावित विसंगतियों की व्यापक जांच के बाद अंतिम प्रमाणित चुनावी नतीजे 4 नवंबर को इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को औपचारिक रूप से सौंपे जाने निर्धारित हैं। वहीं, नवनिर्वाचित नेसेट के सदस्यों को 10 नवंबर को शपथ दिलाई जानी है। इसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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