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स्मृति हानि उलटने की बड़ी खोज

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: मस्तिष्क की ऊर्जा प्रणाली सुधारकर स्मृति हानि को उलटने का दावा

वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा पैदा करने वाले छोटे ढांचे माइटोकॉन्ड्रिया को फिर से सक्रिय करके स्मृति हानि को उलटा किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज मस्तिष्क की ऊर्जा प्रणाली सुधारकर स्मृति हानि को उलटने का दावा

New Study on Improving Brain Function |

वॉशिंगटन डीसी। वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा पैदा करने वाले छोटे ढांचे माइटोकॉन्ड्रिया को फिर से सक्रिय करके स्मृति हानि को उलटा किया जा सकता है। यह अध्ययन न्यूरोडीजेनरेटिव बीमारियों और अल्जाइमर के उपचार में नई उम्मीद जगा सकता है।

माइटोकॉन्ड्रिया की खराबी से जुड़ा बड़ा खुलासा

शोधकर्ताओं ने पाया कि कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र माइटोकॉन्ड्रिया की खराबी, मानसिक गिरावट और स्मृति हानि का सीधा कारण हो सकती है। यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने इस संबंध को स्पष्ट रूप से स्थापित किया है।

चूहों पर किया गया सफल प्रयोग

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने एक विशेष उपकरण का उपयोग किया, जिससे मस्तिष्क में माइटोकॉन्ड्रिया की गतिविधि को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया। मनोभ्रंश से ग्रसित चूहों में ऐसा करने के बाद स्मृति प्रदर्शन में सुधार देखा गया। शोध से संकेत मिला है कि मस्तिष्क में ऊर्जा की कमी न्यूरॉन्स की मौत से पहले भी शुरू हो सकती है। यदि माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता को समय रहते सुधारा जाए, तो स्मृति हानि को धीमा या आंशिक रूप से रोका जा सकता है।

जी प्रोटीन और नया उपकरण

शोधकर्ताओं ने एक विशेष कृत्रिम रिसेप्टर “माइटोड्रेड-जीएस” विकसित किया, जो माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर गतिविधि को बढ़ाने में सक्षम है। इसके सक्रिय होने पर मस्तिष्क की ऊर्जा प्रणाली में सुधार देखा गया। माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावरहाउस कहा जाता है। मस्तिष्क की कार्यक्षमता पूरी तरह इसी ऊर्जा पर निर्भर करती है। इसकी कमी से न्यूरॉन्स का संचार कमजोर हो जाता है और याददाश्त प्रभावित होती है।

शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण परिणाम

हालांकि यह शोध अभी पशु मॉडल पर आधारित है और मनुष्यों पर इसके प्रभाव को लेकर और अध्ययन की जरूरत है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज डिमेंशिया के इलाज में एक नए रास्ते की शुरुआत कर सकती है। शोधकर्ता अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या माइटोकॉन्ड्रिया की गतिविधि को लंबे समय तक बढ़ाकर न केवल लक्षणों को सुधारा जा सकता है, बल्कि बीमारी की प्रगति को भी रोका जा सकता है।

(एएनआई)

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