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तेल नहीं, होर्मुज बनेगा ईरान की कमाई

तेल नहीं अब होर्मुज बनेगा ईरान की कमाई का जरिया

मिडिल ईस्ट में US-ईरान तनाव के बीच नया विवाद, ईरान ने होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है।

तेल नहीं अब होर्मुज बनेगा ईरान की कमाई का जरिया

Energy Security |

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में United States और Iran के बीच तनाव के बाद अब एक नया विवाद सामने आ गया है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित समझौता वार्ता से पहले ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है।

समझौते से पहले नया विवाद

28 फरवरी 2026 को हुए हमलों के बाद ईरान ने इस अहम जलमार्ग को बंद कर दिया था। अब 14 दिनों के लिए इसे खोलने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन नियंत्रण को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

टोल वसूली का ऐलान

सीजफायर के बाद ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद में इस प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है। अटकलें हैं कि यह शुल्क प्रति ट्रांजिट करीब 20 लाख डॉलर तक हो सकता है।

प्रति बैरल शुल्क की योजना

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, ईरान तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का ट्रांजिट टोल लगाने की योजना बना रहा है। खास बात यह है कि यह भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में भी लिया जा सकता है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से गुजरता है, ऐसे में इसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है।

ट्रंप की सख्त चेतावनी

Donald Trump ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ कहा है कि ईरान को जहाजों से शुल्क नहीं लेना चाहिए और अगर ऐसा हो रहा है, तो इसे तुरंत बंद करना होगा।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

अगर ईरान टोल वसूली शुरू करता है, तो India समेत कई देशों की लागत बढ़ सकती है। भारत, जो इस मार्ग से बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, उसे महंगे शिपिंग और ईंधन खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

भारत का रुख अस्पष्ट

भारत की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि इस विषय पर ईरान और भारत के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।

ईरान का राजस्व बढ़ाने का प्लान

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस टोल से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में कर सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि Oman के साथ मिलकर यह शुल्क वसूला जा सकता है।

सीमित आवाजाही की अनुमति

युद्ध के दौरान ईरान ने कुछ “मित्र देशों” को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी। इसमें India, Pakistan जैसे देशों के नाम शामिल थे। हाल ही में भारत के कई जहाज इस मार्ग से सुरक्षित वापस पहुंचे हैं। कुल मिलाकर, Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

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