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खारग द्वीप के पास तेल रिसाव से बढ़ी चिंता

खारग द्वीप के पास बड़ा तेल रिसाव, फारस की खाड़ी में बढ़ी चिंता

ईरान के प्रमुख कच्चे तेल निर्यात केंद्र खारग द्वीप के पास फारस की खाड़ी में बड़े पैमाने पर तेल रिसाव पाया गया है।

खारग द्वीप के पास बड़ा तेल रिसाव फारस की खाड़ी में बढ़ी चिंता

Environmental Crisis |

वॉशिंगटन डीसी। ईरान के प्रमुख कच्चे तेल निर्यात केंद्र खारग द्वीप के पास फारस की खाड़ी में बड़े पैमाने पर तेल रिसाव पाया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उपग्रह तस्वीरों में खारग द्वीप के पश्चिमी तट पर तेल फैलता हुआ दिखाई दिया, जिससे क्षेत्रीय और पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ गई हैं।

20 वर्ग मील क्षेत्र में फैला रिसाव

वैश्विक तेल रिसाव निगरानी सेवा ऑर्बिटल ईओएस के अनुमान के मुताबिक, गुरुवार तक यह रिसाव 20 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र में फैल चुका था। एजेंसी का कहना है कि फारस की खाड़ी के पानी में 3,000 बैरल से ज्यादा तेल फैल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, रिसाव का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव और अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी से ईरान के तेल एवं गैस बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई टैंकर फंस गए हैं, जिससे भंडारण सुविधाओं और अपतटीय टर्मिनलों पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो गया है।

सऊदी जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहा तेल

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती भीड़भाड़ के कारण रिसाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुवार दोपहर तक तेल का फैलाव दक्षिण दिशा में सऊदी जलक्षेत्र की ओर बढ़ता दिखाई दिया, जिससे पर्यावरणीय खतरे और गहरे हो सकते हैं।

ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है खारग द्वीप

खारग द्वीप ईरान के तेल निर्यात उद्योग का सबसे अहम केंद्र माना जाता है। यहां विशाल तेल टर्मिनल, भंडारण टैंक और पाइपलाइन नेटवर्क मौजूद हैं, जो देश की ऊर्जा आय और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने अब तक इस रिसाव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू होने के संकेत

इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान अगले सप्ताह इस्लामाबाद में बातचीत फिर से शुरू कर सकते हैं। दोनों पक्ष 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य एक महीने तक चलने वाली वार्ता प्रक्रिया के जरिए तनाव कम करना है।

फरवरी के हमलों के बाद बढ़ा तनाव

28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था। जवाब में तेहरान ने पलटवार किया और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान उत्पन्न हुआ। पाकिस्तान की मध्यस्थता में 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।

एएनआई ।

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