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नागरिकों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिले

पाकिस्तान पीओजेके में नागरिकों पर अत्याचार कर रहाः जेएसएफएम

खबरों के मुताबिक, जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े युवा कार्यकर्ता शाहज़ेब की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो गए।

पाकिस्तान पीओजेके में  नागरिकों पर अत्याचार कर रहाः जेएसएफएम

जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट (जेएसएफएम) के अध्यक्ष सोहेल अब्रो |

लंदन  ( ब्रिटेन )। जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट (जेएसएफएम) के अध्यक्ष सोहेल अब्रो ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की क्रूर कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और बल प्रयोग को तत्काल रोकने की मांग करते हुए कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिए जाने की बात कही है। एक प्रेस विज्ञप्ति में, अब्रो ने रावलकोट और मुजफ्फरबाद में हालिया अशांति के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा घायल, हिरासत में लिए गए या कथित तौर पर उत्पीड़न का शिकार हुए लोगों के साथ एकजुटता दिखाई।

पाकिस्तान पर असहमति को दबा रहा

उन्होंने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को कश्मीरी आत्मनिर्णय के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया, जबकि साथ ही साथ वह क्षेत्र में असहमति को दबा रहा है। अब्रो के अनुसार, हाल की घटनाओं ने पाकिस्तान के कूटनीतिक बयानों और जमीनी कार्रवाई के बीच विरोधाभास को उजागर किया है। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय सूत्रों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए, अब्रो ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने महिलाओं और बच्चों सहित निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। खबरों के मुताबिक, जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े युवा कार्यकर्ता शाहज़ेब की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो गए। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इसके अध्यक्ष उमर नज़ीर के काफिले को निशाना बनाया था।
अधिकारियों ने हताहतों की संख्या सीमित बताई है।

यूएन समेत विश्व से हस्तक्षेप की मांग

 उन्होंने पाकिस्तान से राजनीतिक बंदियों को रिहा करने, राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों को वापस लेने, नागरिक स्वतंत्रता बहाल करने और जम्मू कश्मीर में कथित हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटिश संसद, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप करने और संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया, ताकि कश्मीरी अपने राजनीतिक भविष्य का निर्धारण कर सकें। (ANI)

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