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महिला डॉक्टर पर एसिड अटैक से मचा बवाल

पाकिस्तान में डॉक्टरों पर बढ़ते हमले, एसिड अटैक के बाद मेडिकल बिरादरी में भारी आक्रोश

पाकिस्तान में हाल ही में एक महिला डॉक्टर पर हुए एसिड अटैक ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है।

पाकिस्तान में डॉक्टरों पर बढ़ते हमले एसिड अटैक के बाद मेडिकल बिरादरी में भारी आक्रोश

File Photo |

कराची (पाकिस्तान)। पाकिस्तान में हाल ही में एक महिला डॉक्टर पर हुए एसिड अटैक ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। पाकिस्तान के मेडिकल समुदाय ने स्वास्थ्य कर्मियों को निशाना बनाने, हिंसा, उत्पीड़न और डराने-धमकाने के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने एसिड अटैक का किया विरोध

महिला डॉक्टर पर हुए एसिड अटैक का डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने खुलकर विरोध किया। पाकिस्तान इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन (PIMA) ने देश में अक्सर होने वाली इन घटनाओं के खिलाफ सरकार से सख्त कानून की मांग की। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक PIMA ने "Who Will Heal the Healers?" नाम से एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया। इस सेमिनार का उद्देश्य देशभर के अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के सामने खड़ी हो रही इस समस्याओं पर प्रकाश डालना था। हाल ही में महिला डॉक्टर पर हुए एसिड अटैक ने अब मामले को और तुल दे दिया है।

अमीर तबके का स्वास्थ्य तंत्र पर कब्जा — PIMA अध्यक्ष का बड़ा आरोप

PIMA के केंद्रीय अध्यक्ष आतिफ हफीज सिद्दीकी ने सेमिनार को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि देश के स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े उद्योगपतियों का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक बेहतर उपचार से वंचित होते जा रहे हैं जबकि अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी महसूस की जा रही है।

डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाओ - सांसदों से सीधी अपील

सिद्दीकी ने सांसदों से डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों को हिंसा, उत्पीड़न और धमकियों से बचाने के लिए ठोस कानून बनाने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला, अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और मेडिकल स्टाफ को धमकी देने जैसे मामलों को गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में रखा जाए।

सिस्टम की खामियों का ठीकरा डॉक्टरों पर नहीं - सिद्दीकी की चेतावनी

PIMA अध्यक्ष ने अस्पताल में दवाइयों की उपलब्धता, अस्पताल में बेड और जरूरी सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन सबकी व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस सभी व्यवस्थाओं की कमी के लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराना या इसकी जिम्मेदारी उनपर डाले जाने को सरासर नाइंसाफी बताया।

ड्यूटी पर अनधिकृत फोटो-वीडियो पर रोक लगाने की मांग

सेमिनार में सिद्दीकी ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि ड्यूटी के दौरान मेडिकल स्टाफ की बिना अनुमति फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग पर सख्त पाबंदी लगाई जाए। साथ ही उनका यह भी कहना था कि संबंधित स्वास्थ्य आयोग की पूर्व समीक्षा के बिना डॉक्टरों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज न किया जाए।

ट्रेनी डॉक्टरों का दर्द - भारी काम, मामूली तनख्वाह

PIMA महिला विंग की अध्यक्ष जकिया औरंगजेब ने सेमिनार में ट्रेनी डॉक्टरों की आर्थिक तंगी सहित अन्य समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के हवाले से बताया कि युवा डॉक्टर बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है लेकिन उनको इसके लिए बहुत वेतन पर काम करना पड़ता है। (ANI)

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