PoJK के एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्ज़ा ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर PoGB और PoJK में मीडिया की बदहाल स्थिति पर प्रकाश डाला और इस ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित कराया।
लंदन (यूके)। PoJK के एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्ज़ा ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मीडिया की आज़ादी की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लगातार जारी संघर्ष की ओर सबका ध्यान खींचा।
स्थानीय लोगों की आवाज़ें की जाती है नज़रअंदाज़
मिर्ज़ा ने अपने संदेश में कहा कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों की आवाज़ें और चिंताएँ अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन लोगों को न सिर्फ़ वास्तविक और स्वतंत्र जानकारी से वंचित रखा जाता है, बल्कि स्थानीय मीडिया में अलग-अलग तरह के विचारों से भी दूर रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अख़बारों के 'राय' वाले पन्ने और संपादकीय हिस्से उन विचारों को जगह नहीं देते जो जम्मू-कश्मीर से जुड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक घटनाक्रमों पर सवाल उठाते हैं।
PID और ISPR के प्रभाव का आरोप
मिर्ज़ा ने आगे दावा किया कि इन इलाकों में मीडिया पर पाकिस्तान के 'प्रेस एंड इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट' (PID) का कड़ा नियंत्रण है। यह PID इस्लामाबाद में स्थित एक सरकारी संस्था है, जो उनके मुताबिक, सेना की मीडिया शाखा- 'इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस' (ISPR) के प्रभाव में काम करती है। उनके मुताबिक इस नियंत्रण का परिणाम यह होता है कि मीडिया में ज़्यादातर कंटेंट छपते हैं जो पाकिस्तान के दृष्टिकोण वाले विचारों को बढ़ावा देते हैं। जबकि इसके विपरीत या अलग राय रखने वाली आवाज़ों को बाहर कर दिया जाता है।
सरकारी विज्ञापनों से बढ़ती अप्रत्यक्ष सेंसरशिप
उन्होंने एक और चिंता जताई, जिसे उन्होंने 'अप्रत्यक्ष सेंसरशिप' का नाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया (अख़बारों) की सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता के कारण उन पर सरकार की बात मानने का दबाव बना रहता है। मिर्ज़ा ने कहा कि इन अखबारों को सरकारी विज्ञापन से होने वाली कमाई खोने का डर रहता है। ये इन क्षेत्र के अख़बारों की आमदनी का मुख्य ज़रिया है। इसे खोने के डर से मीडिया संस्थानों में 'स्व-सेंसरशिप' (खुद पर ही रोक लगाने) की मजबूरी होती है।
टीवी चैनलों की कमी से अख़बारों पर निर्भरता ज्यादा
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी चैनलों) की सीमित मौजूदगी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय टीवी चैनलों के न होने के कारण प्रिंट मीडिया ही जानकारी का मुख्य ज़रिया बन जाता है। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस दबदबे का इस्तेमाल विचारों को अपने हिसाब से गढ़ने और विरोधी तर्कों को दबाने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा है, खासकर PoJK से जुड़े मुद्दों पर।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील
मिर्ज़ा ने इन इलाकों में प्रेस की आज़ादी की स्थिति पर ज़्यादा ध्यान देने की अपील की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया पर नज़र रखने वाली संस्थाओं से आग्रह किया कि वे उन चुनौतियों पर गौर करें जिनका सामना पत्रकारों और आम लोगों को निष्पक्ष और आज़ाद जानकारी हासिल करने में करना पड़ता है।
(ANI)
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