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मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग

पीओजेके के रावलकोट में हजारों लोगों का विरोध प्रदर्शन

कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन में प्रतिभागियों ने बैनर लिए हुए थे और जवाबदेही, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग को समाप्त करने की मांग करते हुए नारे लगाए।

पीओजेके  के रावलकोट में हजारों लोगों का विरोध प्रदर्शन

पीओजेके के रावलकोट में पाकिस्तान के दमन के खिलाफ प्रदर्शन |

रावलकोट (पीओजेके)। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग रावलकोट में इकट्ठा हुए और पाकिस्तान के निरंतर कब्जे और क्षेत्र में उसकी नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मारे गए और घायल हुए नागरिकों के लिए न्याय की मांग की।

निर्दोष नागरिकों पर फायरिग की निष्पक्ष जांच की मांग

कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन में प्रतिभागियों ने बैनर लिए हुए थे और जवाबदेही, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग को समाप्त करने की मांग करते हुए नारे लगाए। रैली को स्थानीय राजनीतिक नेताओं और संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (JAAC) के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया, जिन्होंने अधिकारियों द्वारा विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की आलोचना की और कथित मौतों और चोटों की स्वतंत्र जांच की मांग की। वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से स्थिति पर ध्यान देने और प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की मांग करने का आग्रह किया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने की असहमति को दबाने की निंदा

इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने PoJK में विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तान की व्यापक कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए अधिकारियों पर आगामी क्षेत्रीय चुनावों से पहले अत्यधिक बल प्रयोग करने, असहमति को दबाने और मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेकेजेएएसी) को "प्रतिबंधित संगठन" घोषित करने के फैसले की एमनेस्टी ने कड़ी आलोचना की है। एमनेस्टी ने इस कदम को गैरकानूनी और अनुचित बताते हुए कहा कि यह संगठन बनाने की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण राजनीतिक सक्रियता पर गंभीर हमला है।

सूचना का प्रवाह भी बाधित

क्षेत्र की विधायिका के गठन को लेकर जेकेजेएएसी और अधिकारियों के बीच बातचीत विफल होने के बाद कार्रवाई तेज हो गई। 5 जून को, जिस दिन पाकिस्तान ने 27 जुलाई को क्षेत्रीय चुनावों की घोषणा की, उसी दिन अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं निलंबित कर दीं और आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया। आगंतुकों और पर्यटकों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी गई, जबकि खबरों में संघीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती का संकेत मिला। एमनेस्टी के अनुसार, इन उपायों ने क्षेत्र को प्रभावी रूप से अलग-थलग कर दिया है और सूचना के प्रवाह को बुरी तरह से बाधित कर दिया है। (एएनआई)

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