JAAC और अधिकारियों के बीच वार्ता विफल होने के बाद पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
मुज़फ़्फ़राबाद,(PoJK)। संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (JAAC) और अधिकारियों के बीच वार्ता विफल होने के बाद, सोमवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (PoJK) के रावलकोट में हजारों लोग मुज़फ़्फ़राबाद की ओर मार्च करने के लिए एकत्रित हुए।
52 दिनों से चल रहा विरोध आंदोलन
यह मार्च 52 दिनों से चल रहे विरोध आंदोलन के बीच हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारी बंदियों की रिहाई, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और अपनी व्यापक मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बना रहे हैं। JAAC ने इससे पहले अधिकारियों को 27 जुलाई को दोपहर 1:00 बजे तक अपनी मांगों को स्वीकार करने वाली आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की समय सीमा दी थी और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर हजारों प्रदर्शनकारी रावलकोट से मुज़फ़्फ़राबाद तक मार्च करेंगे।
उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई की मांग
JAAC के बैनर तले संगठित प्रदर्शनकारियों ने पूरे PoJK में प्रदर्शनों और सड़क मार्च के माध्यम से अधिकारियों पर दबाव बनाए रखा है और आंदोलन द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की है। रावलकोट से मुजफ्फरबाद की ओर हुआ यह ताजा मार्च, प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत के विफल होने के बाद हुआ है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच नए सिरे से बातचीत का रास्ता
ये घटनाक्रम मीरपुर डिवीजन की 13 विधानसभा सीटों पर पहले चरण के मतदान के साथ ही हुए हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है, कि शांतिपूर्ण चुनावी प्रक्रिया से सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच नए सिरे से बातचीत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया में भी बाधाएं आई हैं, कोटली से हिंसा की घटनाएं और चुनाव में धांधली के आरोप सामने आए हैं। राजनीतिक दलों ने लंबी हड़ताल और प्रदर्शनों के कारण चुनाव प्रचार में भारी कठिनाइयों की बात कही है।
जनसभाएं, रैलियां और घर-घर जाकर प्रचार करना बाधित
जनसभाएं, रैलियां और घर-घर जाकर प्रचार करना बाधित हुआ है, वहीं जम्मू-कश्मीर के पूरे क्षेत्र में चुनावों में जनता की कम रुचि ने राजनीतिक गतिविधियों को और भी धीमा कर दिया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के सुधनोती और रावलकोट जिलों में विधानसभा चुनाव मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के कारण 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। (एएनआई)
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