पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता को बनाए रखने का आह्वान किया है।
Quad Issues Major Statement on West Asia Crisis, Calls for Safe Maritime Navigation |
अटलांटा: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता को बनाए रखने का आह्वान किया है। शनिवार को अटलांटा में हुई क्वाड बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ मुलाकात की। बैठक में क्वाड मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा पर जोर देने के साथ-साथ मनमाने निर्यात प्रतिबंधों सहित आर्थिक दबाव और जबरदस्ती की गतिविधियों पर भी चिंता जताई।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में क्वाड मंत्रियों ने वैश्विक स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने में आर्थिक सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विश्वसनीय और खुली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ-साथ मजबूत और भरोसेमंद बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रियों ने मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और गैर-बाजार नीतियों एवं प्रथाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से महत्वपूर्ण उद्योगों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। संयुक्त बयान में कहा गया कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, निर्बाध व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और जहाजों तथा नाविकों की बिना किसी टोल के सुरक्षित आवाजाही का विशेष महत्व है। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने की आवश्यकता दोहराई।
चेन्नई से पर्थ तक क्वाड का समुद्री निगरानी मिशन सफल
नाविकों की सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के तहत संयुक्त बयान में दूसरे क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन का भी उल्लेख किया गया। यह मिशन 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक भारत के चेन्नई से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ तक आयोजित किया गया। मंत्रियों ने बताया कि चारों क्वाड देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय तटरक्षक बल के एक अपतटीय गश्ती पोत पर सवार होकर इस मिशन में हिस्सा लिया। इसे अवैध समुद्री गतिविधियों से निपटने के लिए क्वाड देशों के बीच समुद्री सहयोग और परिचालन तालमेल मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
समुद्री ड्रैगन 2027 के तहत बढ़ेगा सहयोग
हिंद महासागर क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए क्वाड देशों ने समुद्री ड्रैगन 2027 के तहत इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबरेशन पहल के पहले अभ्यास को लेकर भी उत्साह जताया। इस पहल की घोषणा मई में नई दिल्ली में आयोजित बैठक के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी साझा करना और समुद्री गतिविधियों पर निगरानी की क्षमता बढ़ाना है। इसके अलावा, क्वाड देशों ने 2027 की शुरुआत में क्वाड मैरीटाइम ट्रेनिंग इनिशिएटिव (MAITRI) के तहत पहला क्वाड मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस ट्रैक 1.5 संगोष्ठी आयोजित करने की घोषणा की। इसके जरिए क्षेत्रीय साझेदारों को समुद्री क्षेत्र की जानकारी, आधुनिक तकनीक और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा करने का मंच मिलेगा। बैठक में हिस्सा लेने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि क्वाड ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने, समृद्धि लाने और पसंद की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। उन्होंने प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। साथ ही आतंकवाद विरोधी प्रयासों, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण के जरिए शांति एवं स्थिरता में योगदान देने की बात कही। एक्स पर अपनी पोस्ट में जयशंकर ने लिखा कि नई दिल्ली और मनीला में पिछली बातचीत के बाद इस साल तीसरी बार अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि क्वाड का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना तथा इंडो-पैसिफिक में गैर-बाजार गतिविधियों और बढ़ते आर्थिक दबाव का मुकाबला करना है। उन्होंने आतंकवाद विरोधी प्रयासों, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ क्वाड के एजेंडे को और आधुनिक बनाने की बात कही।
नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को लेकर जयशंकर ने जताई थी चिंता
क्वाड मंत्रियों की बैठक से पहले शुक्रवार को जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी एस. जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने नागरिक जहाजों और नाविकों पर बार-बार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा को जरूरी बताया था। जयशंकर ने कहा था कि ग्लोबल साउथ के देशों को नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमलों के परिणामों का असमान रूप से सामना करना पड़ रहा है। इन घटनाओं से ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ उनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है।
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