कराची में सार्वजनिक परिवहन की हड़ताल के कारण हाहाकार मचा हुआ है। ई-चालान, भारी जुर्माने और सख्त नियमों के खिलाफ ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने पूरे शहर में 'चक्का जाम' कर दिया है।
Thousands Commuters Stranded as Transporters Traffic Police Talks Fail over E-Challans |
कराची (पाकिस्तान)। कराची में सार्वजनिक परिवहन की हड़ताल के कारण हाहाकार मचा हुआ है। ई-चालान, भारी जुर्माने और सख्त नियमों के खिलाफ ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने पूरे शहर में 'चक्का जाम' कर दिया है। ट्रैफिक अधिकारियों और ट्रांसपोर्टर्स के बीच हुई बातचीत पूरी तरह बेनतीजा रही, जिसके बाद ट्रांसपोर्ट संघ ने हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण सड़कों से बसें और कोच गायब हैं, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
DIG ट्रैफिक से नहीं निकला समाधान
कराची ट्रांसपोर्ट इत्तेहाद (KTI) के अध्यक्ष हाजी तवाब खान ने पुष्टि की कि हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) ट्रैफिक के साथ बातचीत बिना किसी समाधान के खत्म हो गई। उन्होंने कहा कि हालांकि DIG ने ट्रांसपोर्टरों की चिंताओं को माना और विवादित जुर्माने की समीक्षा करने का वादा किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ई-चालान को रद्द करने का अधिकार उनके कार्यालय के पास नहीं है।
सरकार के रवैये से ट्रांसपोर्टर्स में निराशा
तवाब ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों की मुख्य मांगों में से किसी को भी स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि सरकार ने संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ सीधे बातचीत नहीं की। बार-बार अपील करने के बावजूद, ट्रांसपोर्ट प्रतिनिधियों को अभी तक ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक का मौका नहीं मिला है जो उनकी शिकायतों का समाधान कर सकें। KTI के उपाध्यक्ष मुहम्मद इलियास ने ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की चार मुख्य चिंताओं का ज़िक्र किया।
कैमरे से अंधाधुंध जुर्माने और भारी लागत का विरोध
इनमें सबसे अहम है ट्रैफिक चौराहों पर लगे हाई-रिज़ॉल्यूशन सर्विलांस कैमरों और ट्रैफिक पुलिस कर्मियों द्वारा पहने जाने वाले बॉडी कैमरों से जारी होने वाले जुर्माने की बढ़ती संख्या। ऑपरेटरों का तर्क है कि जुर्माना बहुत ज़्यादा हो गया है और ऑपरेशन की बढ़ती लागत के बीच इसे वहन करना मुश्किल हो गया है।
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और इंश्योरेंस नियमों पर आपत्ति
ट्रांसपोर्टरों ने गाड़ी के मालिकाना हक के ट्रांसफर के लिए ज़रूरी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे बेवजह जटिल और समय लेने वाला बताया है। विवाद का एक और मुद्दा अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी है, जिसकी लागत 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक गाड़ी मालिकों को सालाना लगभग 12,000 रुपये पड़ती है। जारी हड़ताल ने पूरे कराची में आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कों से बसें, मिनी बसें और कोच लगभग गायब हैं, जिससे यात्रियों को महंगे वैकल्पिक ट्रांसपोर्ट साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। साथ ही, इससे रेगुलेटर और शहर के ट्रांसपोर्ट सेक्टर के बीच बढ़ता तनाव भी सामने आया है। (Source: ANI)
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