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खाड़ी में शांति की कोशिशें नाकाम

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव, दोनों देशों ने ठुकराए एक-दूसरे के शांति प्रस्ताव

अमेरिका और ईरान ने खाड़ी में शांति के लिए भेजे एक-दूसरे के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने अमेरिका के प्रस्तावित योजना के नकारे जाने की जानकारी दी।

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव दोनों देशों ने ठुकराए एक-दूसरे के शांति प्रस्ताव

US and Iran Reject Each Other’s Peace Proposals |

नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान ने खाड़ी में शांति के लिए भेजे एक-दूसरे के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। भारत में ईरानी दूतावास के अनुसार इस इस्लामिक रिपब्लिक ने अमेरिका की ओर से आई प्रस्तावित योजना को नकारते हुए प्रस्ताव का जवाब भेजा था जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पूरी तरह खारिज कर दिया है।

अमेरिका की 'बढ़ाचढ़ा कर की गई मांगें' नामंजूर

भारत में ईरान के दूतावास ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा है- 'अमेरिका के प्लान को स्वीकार करने का मतलब है-उसकी बढ़ाचढ़ा कर की गई मांगों को स्वीकार करना है। अमेरिकी योजना के जवाब में पेश किया गया ईरान का प्रस्ताव, ईरानी देश के मूल अधिकारों पर जोर देता है। अमेरिका के प्लान पर ईरान के जवाब का ब्योरा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'मंजूर नहीं' कहा।'

ईरान ने युद्ध हर्जाने और संप्रभुता का उठाया मुद्दा

ईरानी दूतावास ने आगे कहा, 'ईरान का प्लान इस बात पर जोर देता है कि अमेरिका को युद्ध का हर्जाना देना जरूरी है और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। ईरान ने बैर खत्म करने और देश के जब्त की गईं संपत्तियों को मुक्त करने की जरूरत पर जोर दिया है।'

घाना स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप पर कसा तंज

वहीं, घाना में ईरानी दूतावास ने ट्रंप के एक बयान पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने कुछ 'पढ़ा' है, जबकि वास्तविकता यह है कि उस सामग्री का मूल सार उनके लिए अब भी एक रहस्य बना हुआ है। इसके बावजूद वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि उन्हें वह पसंद नहीं आया। कहा जा रहा है कि ट्रंप केवल वैश्विक ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। ह्वाइट हाउस के आंतरिक सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है कि उनका पूरा कार्यकाल दरअसल एक 'मल्टी-बिलियन डॉलर थेरेपी सेशन' के अतिरिक्त और कुछ नहीं है, एक ऐसा उपचार, जो उन्हें उनके बचपन के दिनों में कभी प्राप्त नहीं हो सका।'

ट्रंप ने ईरान के जवाब को बताया नामंजूर

दरअसल, ईरान की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'ट्रूथ सोशल' पर पोस्ट किया था कि मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया, बिल्कुल मंजूर नहीं। वॉशिंगटन के ताजा प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, जलडमरूमध्य खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वापस लेने के लिए समझौते की बात कही गई है। ईरान के जवाब पर प्रतिक्रिया देने से पहले ट्रंप ने पोस्ट में तेहरान पर 50 वर्षों तक अमेरिका के साथ खेलने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब वे ऐसा नहीं कर पाएंगे।

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