अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान के कच्चे तेल (Crude Oil), पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री से जुड़े लेनदेन को अस्थायी रूप से मंजूरी दे दी है।
वॉशिंगटन डीसी (अमेरिका)। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की ऊर्जा राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में सोमवार को एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Department of the Treasury) ने एक बेहद अहम फैसला लेते हुए ईरान के कच्चे तेल (Crude Oil), पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री से जुड़े लेनदेन को अस्थायी रूप से मंजूरी दे दी है। अमेरिका ने इसके लिए 60 दिनों का एक जनरल लाइसेंस जारी किया है। यह फैसला एक बड़े कूटनीतिक समझौते के बाद आया है, जिससे इस क्षेत्र में जारी तनाव कम होने और दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के दोबारा पूरी तरह खुलने की उम्मीद है।
स्विट्जरलैंड वार्ता से खुला रास्ता, अमेरिकी वित्त मंत्री ने की पुष्टि
इस ऐतिहासिक फैसले की पृष्ठभूमि स्विट्जरलैंड में चल रही दोनों देशों की बातचीत से जुड़ी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की है कि यह फैसला स्विट्जरलैंड में चल रही द्विपक्षीय वार्ताओं में हुई प्रगति का नतीजा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "स्विट्जरलैंड में चल रही सकारात्मक बातचीत के तहत, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मुक्त और खुले ट्रांजिट (आवाजाही) का भरोसा दिया है और वह अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को आने की अनुमति देने पर सहमत हुआ है।" उन्होंने आगे लिखा, "इसी फ्रेमवर्क के तहत, वित्त मंत्रालय ने एक अस्थायी 60 दिवसीय जनरल लाइसेंस जारी किया है, जो ईरानी तेल के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री को अधिकृत करता है।"
आम उपभोक्ताओं और बाजार पर क्या होगा इसका असर?
आसान भाषा में समझें: इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि ग्लोबल मार्केट में अब ईरानी तेल की सप्लाई तेजी से बढ़ेगी। जब बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें नीचे आ सकती हैं, जिसका सीधा फायदा भारत सहित दुनिया भर के आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के दामों में राहत के रूप में मिल सकता है।
शिपिंग और इंश्योरेंस कंपनियों को भी मिली हरी झंडी
अमेरिका द्वारा दी गई इस छूट का दायरा काफी बड़ा है। इसके तहत ईरानी तेल और उसके डेरिवेटिव्स (उत्पादों) के एक्सपोर्ट के साथ-साथ उससे जुड़ी जरूरी सपोर्टिंग सर्विसेज को भी छूट दी गई है। अब बैंकिंग से जुड़े फाइनेंशियल प्रोसेसिंग, समुद्री परिवहन (Maritime Transport) और जहाजों के इंश्योरेंस (बीमा) से जुड़े काम भी बिना किसी कानूनी अड़चन के हो सकेंगे।
इतना ही नहीं, इस छूट के दायरे में ईरानी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त राज्य अमेरिका (US) में इम्पोर्ट (आयात) भी शामिल है, बशर्ते यह लेनदेन नए छूट नियमों के तहत बिक्री या डिलीवरी को पूरा करने के लिए जरूरी हो। हालाँकि, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि प्रतिबंधों में दी गई यह ढील उत्तर कोरिया या क्यूबा के साथ होने वाले किसी भी लेन-देन पर लागू नहीं होगी। वे देश अभी भी अमेरिका के सख्त प्रतिबंधों के दायरे में ही रहेंगे। (Source: ANI)
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