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इस्लामाबाद वार्ता विफल

अमेरिका-ईरान में 21 घंटे की वार्ता रही बेनतीजा, अमेरिका लौटे जेडी वेंस

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में चल रही वार्ता बेनतीजा रही। 21 घंटे चली वार्ता में अवरोध के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति अमेरिका लौट गए।

अमेरिका-ईरान में 21 घंटे की वार्ता रही बेनतीजा अमेरिका लौटे जेडी वेंस

US-Iran Talks Collapse After 21 Hours in Islamabad |

इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में चल रही वार्ता बेनतीजा रही। 21 घंटे चली वार्ता में अवरोध के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति अमेरिका लौट गए। वेंस ने रविवार को बताया कि वार्ता किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रही।

विफल बातचीत के बाद अमेरिका लौटे वेंस

वाशिंगटन रवाना होने से पहले संवाददाओं से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस वार्ता की विफलता के बाद हम पहले चक्र की वार्ता के दौर में पहुंच गए। वेंस को विदा करने के लिए हवाई अड्डे पर पहुंचने वालों में पाकिस्तान के गृहमंत्री इशाक डार और सैन्य प्रमुख जन. असीम मुनीर भी थे। वेंस ने कहा कि वे अमेरिका लौट रहे है, यह ईरान के लिए बुरी खबर है, इसके बाद अमेरिका के लिए भी।

1979 के बाद पहली उच्च स्तरीय सीधी वार्ता रही असफल

पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई इस वार्ता पर दुनिया भर की नजर थी। अमेरिका और ईरान के बीच यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली प्रत्यक्ष, उच्च स्तरीय बातचीत थी। वेंस ने कहा, "हमने कई मुद्दों पर चर्चा की लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों।" अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल "काफी लचीला और सहयोगी" था लेकिन "दुर्भाग्य से, हम आगे नहीं बढ़ सके।" उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में थे।

परमाणु मुद्दे पर अड़ा रहा अमेरिका

वेंस ने कहा, "हम नेक नीयत से बातचीत कर रहे थे और हम अपनी टीम के साथ लगातार संपर्क में थे। हम एक बहुत ही सरल प्रस्ताव के साथ विदा लेते हैं। आपसी सहमति का एक तरीका जो हमारा अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।" उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का "मुख्य लक्ष्य" ईरान को "परमाणु हथियार" हासिल करने से रोकना है और "हमने इन वार्ताओं के जरिये यही हासिल करने की कोशिश की है।"

पाकिस्तान की मेजबानी की सराहना

वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की और उन्हें बेहतरीन मेजबान बताया। उन्होंने कहा, "वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं। उन्होंने शानदार काम किया और हमारे एवं ईरानियों के बीच मतभेदों को पाटकर समझौते तक पहुंचने में मदद करने की वाकई कोशिश की।"

वेंस ने चर्चा को आगे बढ़ाने का नहीं दिया कोई संकेत

वेंस वार्ता के बाद वाशिंगटन रवाना हो गए। उन्होंने चर्चा को आगे बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया। ईरान और अमेरिका दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद शनिवार को बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया।

परमाणु, प्रतिबंध और सैन्य मुद्दों पर अटकी रही बातचीत

ईरानी पक्ष में विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत अन्य लोग शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि विशेषज्ञ स्तर की बातचीत में आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मुद्दों पर चर्चा हुई तथा लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि विवाद के प्रमुख मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, संपत्ति फ्रीज करना और लेबनान में इस्राइली हमले के मुद्दे शामिल रहे। ईरान ने बातचीत के लिए 10 सूत्री योजना पेश की थी। इसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी बलों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांग शामिल थी।

युद्ध का असर वैश्विक बाजारों पर, तनाव बरकरार

पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की अगुवाई की। इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद हुई थी। इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार ठप पड़ गए हैं और व्यापक पैमाने पर व्यापार प्रभावित हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी 'एक्स' पर एक संदेश में पुष्टि की कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और  दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने लिखा, "पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दे, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंध हटाने और ईरान के खिलाफ एवं क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।"

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