अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने ईरान पर सैन्य हमले की आशंका जताई है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाते हुए समझौते पर न पहुंचने की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी दी है।
United States ambassador to Turkiye and the special envoy for Syria, Tom Barrack (File Photo) |
अंकारा (तुर्किये) तुर्किये में अमेरिकी राजदूत टॉम बराक के उस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने इसी सप्ताहांत ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की बात कही है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा रैली में तेहरान को चेतावनी देते हुए सैन्य विकल्प खुले रखने का संकेत दिया है।
बैराक का बड़ा दावा: इस सप्ताहांत हो सकता है हमला
तुर्किये में अमेरिकी राजदूत और ट्रंप के विशेष दूत टॉम बैराक ने शुक्रवार को लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमी मारियो नौफल के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमला इस सप्ताहांत भी संभव है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कतर और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश वाशिंगटन और तेहरान के बीच दूरियां मिटाने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। बैराक ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन अमेरिका, उसके सहयोगियों और खाड़ी देशों को मिलने वाली धमकियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि परमाणु हथियारों से जुड़े तत्काल खतरे को नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन, होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करने, प्रतिबंधों में ढील और इजराइल के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता जैसे मुद्दों पर अभी भी पेच फंसा हुआ है। बैराक ने साफ किया कि अमेरिका का मकसद 'सत्ता परिवर्तन' (regime change) नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बहाल करना है ताकि दुनिया में शांति कायम हो सके। साथ ही, उन्होंने ईरानी जनता और 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के बीच फर्क स्पष्ट करते हुए IRGC को अमेरिका और इज़राइल का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बताया।
ट्रंप की दोटूक: अनभिज्ञता और आक्रामक तेवर
हालांकि, बैराक के इस बयान के कुछ घंटों बाद फ्लोरिडा पहुंचते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हैरानी जताई। जब संवाददाताओं ने उनसे पूछा कि उनके राजदूत ने इस सप्ताहांत ईरान पर हमले की बात कही है, तो ट्रंप ने चुटकी लेते हुए कहा, "क्या वह मेरे राजदूत थे? वह काफी ताकतवर इंसान लगते हैं, लेकिन अगर ऐसा है तो मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता।"
इसके तुरंत बाद फ्लोरिडा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप के तेवर पूरी तरह आक्रामक नजर आए। उन्होंने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान कोई कूटनीतिक समझौता करने में विफल रहता है, तो अमेरिका 'एपिक फ्यूरी' जैसी सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "यदि वे समझदार हैं, तो वे कहेंगे कि चलिए समझौते की बात करें, लेकिन मुझे संदेह है कि वे ऐसा करेंगे।"
मिडटर्म चुनाव और गहराता पश्चिम एशिया संकट
विश्लेषकों का मानना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के मद्देनजर अमेरिका और ईरान दोनों ने अपने रुख को बेहद सख्त कर लिया है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और किसी भी वक्त स्थिति बिगड़ सकती है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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