होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशियाई संकट को लेकर तनाव को कम करने में चीन की संभावित भूमिका को लेकर अमेरिकी नेतृत्व में अलग-अलग स्वर उठ रहे हैं।
वाशिंगटन (अमेरिका)। होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशियाई संकट को लेकर तनाव को कम करने में चीन की संभावित भूमिका को लेकर अमेरिकी नेतृत्व में अलग-अलग स्वर उठ रहे हैं। विदेशमंत्री मार्को रुबियो ने बीजिंग से होर्मुज को दोबारा खुलवाने के लिए और सक्रिय राजनयिक निभाने का आग्रह किया है। उधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की संलिप्तता को कम मानते हुए कहा कि अमेरिका स्थिति से स्वतंत्र रूप से अकेले सुलझा लेगा।
मार्को रुबियो का चीन से सक्रिय कूटनीति का आग्रह
एयर फ़ोर्स वन में यात्रा करते हुए 'फॉक्स न्यूज़' के साथ भेंटवार्ता में रूबियो ने कहा कि वाशिंगटन ने चीन से आग्रह किया था कि वह ईरान पर दबाव बनाने में मदद करने और जलडमरूमध्य के माध्यम से सामान्य समुद्री यातायात को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करे और संयुक्त राष्ट्र में भी समर्थन करे।
चीन के रणनीतिक और आर्थिक हितों का हवाला
रुबियो ने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवधान चीन के रणनीतिक और आर्थिक हितों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं, उन्होंने जहाजरानी संबंधी बाधाओं, क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक व्यापार प्रवाह के लिए जोखिमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्वी ऊर्जा स्रोतों पर चीन की निर्भरता और उसकी निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था बीजिंग को तनाव कम करने का समर्थन करने के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करती है।
आर्थिक अस्थिरता और समाधान की तलाश
उनका यह भी सुझाव है कि खाड़ी में अस्थिरता के कारण होने वाली वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल चीनी निर्यात की मांग को कमजोर कर सकती है, जिससे बीजिंग के अपने आर्थिक हित में एक समाधान निकल सकता है। दसरी तरफ, ट्रंप ने इससे बिल्कुल अलग रुख अपनाया और संकेत दिया कि ईरान की स्थिति को संभालने के लिए वाशिंगटन को बाहरी सहायता की आवश्यकता नहीं है।
ट्रंप का स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने का दावा
चीन रवाना होने से पहले ह्वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने स्थिति को 'पूरी तरह से नियंत्रण में' रखा है और संकेत दिया कि कोई भी समाधान अमेरिकी शर्तों पर ही निकलेगा। ईरान के संबंध में शी जिनपिंग को दिए गए अपने संदेश के बारे में पूछे जाने पर, ट्रम्प ने चीनी नेता की प्रशंसा की, लेकिन आगामी वार्ता में इस मुद्दे के महत्व को कम करके आंका, यह संकेत देते हुए कि व्यापार और व्यापक द्विपक्षीय संबंध चर्चाओं पर हावी रहेंगे।
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