अमेरिकी आव्रजन और नागरिकता सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, वीज़ा नियम कड़े होने के बाद शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एच-1बी वीसा मंजूरियों में 40 फीसदी की गिरावट आई है।
न्यूयॉर्क। अमेरिका में वीसा को लेकर नियमों को कड़ा किए जाने के बाद बेहतर रोजगार की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं को झटका लगा है।अमेरिका में वीजा के लिये लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर दिया गया है और न्यूनतम वेतन की सीमा को काफी बढ़ा दिया गया है। नए नियमों के तहत अब उच्च डिग्री और अधिक वेतन वाले आवेदकों—खासकर अमेरिकी विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त लोगों—को प्राथमिकता दी जा रही है। अमेरिकी वीजा नियमों में बदलाव और सख्त नियमों के के कारण संपूर्ण एच-1बी वीजा पंजीकरण में 38.5% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
विप्रो के वीसा में बड़ी गिरावट
अमेरिकी आव्रजन और नागरिकता सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, वीज़ा नियम कड़े होने के बाद शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एच-1बी वीसा मंजूरियों में 40 फीसदी की गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2026 में टीसीएस (TCS) की वीजा मंजूरियों में 53%, विप्रो में 62% और टेक महिंद्रा में 59% की गिरावट आई है।
मार्च 2026 तक भारत की छह सबसे बड़ी आईटी कंपनियों को सिर्फ 11,041 वीसा मिले
आधिकारिक अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक भारत की छह सबसे बड़ी आईटी कंपनियों (टीसीएस, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो और टेक महिंद्रा) को केवल 11,041 एच-1बी वीसा मिले, जो पिछले साल के 18,469 वीसा के मुकाबले काफी कम हैं।ये आंकड़े भारतीय आईटी क्षेत्र के अमेरिकी वीजा उपयोग में हाल के समय में सबसे तेज एक वर्षीय गिरावट को दर्शाते हैं , और यह संकेत देते हैं कि अमेरिकी ग्राहकों के कार्यालयों में कर्मचारियों की भर्ती के लिए एच-1बी मार्ग पर उद्योग की लंबे समय से चली आ रही निर्भरता संरचनात्मक रूप से कमजोर हो गई है।