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यारकंद नरसंहार पर उइगरों ने मांगा न्याय

यारकंद नरसंहार की 12वीं बरसी: उइगर संगठन ने चीन से मांगा न्याय और जवाबदेही

उइगर संगठन सीएफयू ने यारकंद नरसंहार की 12वीं बरसी पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और चीन से कथित अत्याचारों पर जवाबदेही की मांग की।

यारकंद नरसंहार की 12वीं बरसी उइगर संगठन ने चीन से मांगा न्याय और जवाबदेही

Uyghurs Seek Justice on 12th Yarkand Massacre Anniversary |

वाशिंगटन डीसी [अमेरिका]: उइगर समुदाय के लिए अभियान (सीएफयू) ने यारकंद नरसंहार की 12वीं वर्षगांठ पर 28 जुलाई 2014 को पूर्वी तुर्किस्तान के यारकंद में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और चीनी सरकार पर उइगर समुदाय के खिलाफ कथित अत्याचारों के लिए अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। प्रेस विज्ञप्ति में सीएफयू ने कहा कि यारकंद की घटना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा उइगर समुदाय पर चलाए जा रहे दमनकारी अभियान की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक थी।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई का आरोप

संगठन के अनुसार, 28 जुलाई 2014 को चीनी सुरक्षा बलों ने यारकंद में शांतिपूर्ण उइगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। सीएफयू का आरोप है कि 12 साल बाद भी चीनी अधिकारी इस घटना से जुड़ी सच्चाई को छिपा रहे हैं और ऐसी नीतियां जारी हैं, जिन्हें संगठन उइगरों के खिलाफ जारी दमन का हिस्सा मानता है।

 महिलाओं और ग्रामीणों को भी बनाया गया निशाना: सीएफयू

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सीएफयू ने दावा किया कि चीनी सुरक्षाबलों ने महिलाओं समेत कई उइगर नागरिकों पर गोलीबारी की। संगठन का आरोप है कि धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक पहचान के कारण लोगों को निशाना बनाया गया। सीएफयू ने यह भी दावा किया कि हिंसा आसपास के गांवों तक फैल गई, जहां बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, मारपीट और हत्याएं हुईं। संगठन के मुताबिक, घटना के बाद संचार सेवाओं पर रोक लगा दी गई और प्रभावित क्षेत्रों को बाहरी दुनिया से अलग कर दिया गया।

 उइगरों पर दमन के व्यापक आरोप

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि चीनी सरकार उइगर समुदाय के खिलाफ व्यापक निगरानी, मनमानी हिरासत, जबरन श्रम, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतिबंध तथा असहमति के दमन जैसी नीतियां लागू कर रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि उइगरों को सुरक्षा के लिए खतरा बताकर उनके खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराया जाता है।

कार्यकारी निदेशक ने की अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की अपील

सीएफयू की कार्यकारी निदेशक रुशान अब्बास ने कहा कि यारकंद नरसंहार उइगर समुदाय को अमानवीय तरीके से पेश किए जाने की दर्दनाक याद दिलाता है। उन्होंने अपनी बहन गुलशन अब्बास की गिरफ्तारी का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें 2018 से अमेरिका में उनके मानवाधिकार अभियान के कारण जेल में रखा गया है। संगठन ने सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों से चीनी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने, भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और यारकंद समेत उइगर समुदाय से जुड़े सभी पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपील की।

(एएनआई)

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