Afghanistan : तालिबान सरकार पाकिस्तान के साथ युद्ध की अपेक्षा नहीं करती और अच्छे पड़ोसी संबंधों की नीति पर कायम है।
Afghanistan : तालिबान सरकार पाकिस्तान के साथ युद्ध की अपेक्षा नहीं करती और अच्छे पड़ोसी संबंधों की नीति पर कायम है। यह बात तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कही। उन्होंने जोर देकर कहा-दोनों पक्षों के बीच टकराव किसी के भी हित में नहीं है।
टोलो न्यूज के अनुसार, मुजाहिद ने काबुल- इस्लामाबाद के बीच बढ़ते तनाव को कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला बताया और कहा कि यह किसी रचनात्मक उद्देश्य को पूरा नहीं करता। उन्होंने तनाव के लिए दो संभावित कारण भी गिनाए। जैसे कि पाकिस्तान के कुछ हलकों का किसी अन्य देश के इशारे पर काम करना या यह गलतफहमी कि सत्ता में आने के बाद तालिबान पाकिस्तान के नियंत्रण में रहेगा। मुजाहिद ने साफ किया कि यह तनाव पाकिस्तान के अपने हितों को नहीं दर्शाता है।
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, यह पाकिस्तान का युद्ध नहीं है। यह लड़ाई किसी अन्य पक्ष की ओर से थोपी जा रही है और हमलावर भाड़े के सैनिकों की तरह काम कर रहे हैं या फिर यह धारणा थी कि इस्लामिक एमिरेट पाकिस्तान का विस्तार है और उसके नियंत्रण में है।
सुरक्षा चिंताओं पर बोलते हुए उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया। उनके अनुसार, टीटीपी के ठिकाने पाकिस्तान के अंदर हैं, उसके कमांड जोन और नियंत्रित क्षेत्र हैं। इसलिए उसे अफगानिस्तान आने की जरूरत नहीं है। मुजाहिद ने बातचीत की अपील की। तालिबानी प्रवक्ता मुजाहिद ने 20 साल के संघर्ष में किसी विदेशी समर्थन के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का युद्ध पूरी तरह देश की धरती पर लड़ा गया।
हर प्रांत में तालिबान ने स्वतंत्र रूप से लड़ाई की और किसी देश का एहसान नहीं लिया। बढ़ते तनाव के बीच धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक हस्तियों ने वर्चुअल मीटिंग में दोनों देशों के बीच तत्काल बातचीत फिर शुरू करने का सुझावा दिया। साथ ही, सीमा पर किए जा रहे प्रयासों को समर्थन देने की मांग की।
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