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SBI Research Report: मार्च 2027 तक 6.75% तक गिर सकती है भारतीय बॉन्ड यील्ड, मजबूत होगा रुपया

एसबीआई रिसर्च के मुताबिक मार्च 2027 तक भारतीय बॉन्ड यील्ड घटकर 6.75-7 फीसदी हो सकती है। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से भारतीय रुपये को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।

sbi research report मार्च 2027 तक 675 तक गिर सकती है भारतीय बॉन्ड यील्ड मजबूत होगा रुपया

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नई दिल्ली। भारतीय वित्तीय बाजार और बॉन्ड निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। एसबीआई रिसर्च की ताजा 'इकोव्रैप' रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2027 तक भारत के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 6.75 से 7 प्रतिशत के दायरे में आ सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के चलते भारतीय रुपये में भी मजबूती का रुख बने रहने का अनुमान है।

अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का खतरा बरकरार

लंबी अवधि में राहत के संकेतों के बावजूद रिपोर्ट में निकट भविष्य की अनिश्चितताओं को लेकर आगाह किया गया है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी के कारण भारतीय बॉन्ड यील्ड अस्थायी रूप से 7.6 प्रतिशत के स्तर को छू सकती है। 

इसी तरह, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी अपने मौजूदा 4.9 प्रतिशत के स्तर से उछलकर 5.25 से 5.35 प्रतिशत तक जा सकती है।

अमेरिकी बाजार में आपूर्ति और मांग का असंतुलन

एसबीआई रिसर्च की 'इकोव्रैप' रिपोर्ट के अनुसार, सबसे संभावित परिदृश्य में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.75 प्रतिशत पर स्थिर होगी। हालांकि, अमेरिकी सरकार की भारी उधारी जरूरतों और बॉन्ड्स की मांग-आपूर्ति में अंतर के कारण यील्ड ऐतिहासिक स्तरों से ऊपर बनी रह सकती है।

अनुमान है कि अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में फिलहाल 304 अरब डॉलर की अतिरिक्त आपूर्ति है, जो वहां के जीडीपी के 6.15 प्रतिशत राजकोषीय घाटे को दर्शाती है। साल 2015 में यह असंतुलन महज 140 अरब डॉलर था, जब राजकोषीय घाटा 2.5 प्रतिशत था।

यील्ड घटाने के लिए अमेरिका को काटने होंगे खर्च

रिपोर्ट में कहा गया है कि 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड को 4.75 प्रतिशत पर लाने के लिए अमेरिकी सरकार को अपनी उधारी या खर्च में 100 से 120 अरब डॉलर की कटौती करनी होगी। अगर यील्ड को 4.5 प्रतिशत तक लाना है, तो उधारी में 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त कटौती जरूरी होगी।

भारतीय बॉन्ड बाजार की स्थिति और सरकारी उपाय

भारतीय बाजार की बात करें तो देश के सरकारी प्रतिभूति बाजार में लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आपूर्ति का अनुमान है। 

हालांकि, सरकार द्वारा बॉन्ड स्विच और बायबैक जैसे रणनीतिक कदमों से अपनी कुल उधारी जरूरत को पहले ही 1.23 लाख करोड़ रुपये कम कर लिया गया है। इस कदम से भारतीय बॉन्ड यील्ड को बड़ा सहारा मिला है।

भारत-अमेरिका यील्ड स्प्रेड और आरबीआई का रुख

फिलहाल भारत और अमेरिका के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच 250 बेसिस पॉइंट्स का स्प्रेड (अंतर) है। भारतीय यील्ड लगभग 7.43 प्रतिशत और अमेरिकी यील्ड 4.93 प्रतिशत पर है। 

ऐतिहासिक रूप से 200 से 300 बेसिस पॉइंट्स का स्प्रेड सामान्य माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 6 प्रतिशत भी कर देता है, तब भी मार्च 2027 तक भारतीय बॉन्ड यील्ड 6.75-7 प्रतिशत के दायरे में ही टिकेगी।

अमेरिकी टेक दिग्गजों पर बढ़ता कर्ज का संकट

इकोव्रैप रिपोर्ट में अमेरिकी टेक कंपनियों के बढ़ते कर्ज को लेकर भी चिंता जताई गई है। यील्ड में बढ़ोतरी के कारण 'मैग्निफिसेंट सेवन' (Magnificent Seven) नाम से मशहूर दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन को 1.67 से 2 ट्रिलियन डॉलर तक का भारी नुकसान हो सकता है।
(इनपुट: ANI)

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