भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद सेंसेक्स 1000 अंक से अधिक गिरकर बंद हुआ।
मुंबई (महाराष्ट्र)। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली के बीच सेंसेक्स 1,000 से अधिक अंकों की भारी गिरावट के साथ 71,593.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी फिसलकर 22,231.80 पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की आक्रामक बिकवाली, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट (bps) बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने और ब्रेंट क्रूड के 104 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से बाजार के सेंटिमेंट्स पर गहरा असर पड़ा है, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए हैं।
बाजार में चौतरफा बिकवाली और इंडेक्स का हाल
सेंसेक्स पिछले सत्र के 72,638.70 के मुकाबले 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत लुढ़ककर 22,231.80 पर बंद हुआ। बाजार के सभी प्रमुख सूचकांक (Broad Market Indices) लाल निशान पर बंद हुए, जिसमें निफ्टी मिडकैप 50 सबसे ज्यादा 2.71 प्रतिशत टूटा। सेक्टरवार बात करें तो निफ्टी मेटल में सबसे बड़ी, यानी 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर का स्थान रहा।
विशेषज्ञों की राय: रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का विश्लेषण
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा, "बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे मौजूदा सुधारात्मक रुख (Corrective Trend) और गहरा हो गया और सूचकांक में लगभग डेढ़ प्रतिशत की गिरावट आई। कमजोर शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स पूरे सत्र के दौरान दबाव में रहे और अंततः दिन के सबसे निचले स्तर के करीब बंद हुए।"
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इंफोसिस टॉप गेनर्स रहे, जबकि आईटीसी, इंडिगो, पावर ग्रिड, बीईएल, अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, रिलायंस, मारुति, टाटा स्टील, एलएंडटी और भारती एयरटेल प्रमुख ड्रैगर्स रहे। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर भी इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एक्सिस बैंक बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि अडानी एंटरप्राइजेज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आईटीसी और मैक्स हेल्थकेयर प्रमुख नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
अजीत मिश्रा ने आगे कहा, "घरेलू और वैश्विक स्तर पर मैक्रोइकोनॉमिक चिंताएं बाजार पर हावी रहीं। आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% करने और अपने रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग (सोच-समझकर सख्ती) की तरफ मोड़ने से कड़े वित्तीय हालातों को लेकर चिंता बढ़ गई है।" भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 102 से 103 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3 प्रतिशत के आसपास उच्च स्तर पर है। रिपोर्ट लिखे जाने के समय ब्रेंट क्रूड 104.49 डॉलर प्रति बैरल और कच्चा तेल 91.94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
तकनीकी दृष्टिकोण और आगे की चाल
तकनीकी रूप से, निफ्टी ने मामूली पुलबैक के बाद एक बार फिर अप्रैल 2026 के 22,182.55 के निचले स्तर को रीटेस्ट किया है, जो बाजार की मौजूदा संरचना में और कमजोरी का संकेत देता है। अजीत मिश्रा ने कहा, "इस स्तर से नीचे एक निर्णायक गिरावट बाजार को 21,700 से 22,000 के दायरे में धकेल सकती है। ऊपर की ओर, 22,400 का स्तर तत्काल बाधा का काम करेगा, जिसके बाद 22,700 से 22,800 अगला प्रमुख प्रतिरोध (Resistance) होगा।"
बाजार विश्लेषक विपिन डिक्सेना का दृष्टिकोण
मार्केट एनालिस्ट विपिन डिक्सेना ने कहा, "मेरे विचार से आज का करेक्शन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कई मैक्रोइकोनॉमिक बाधाएं एक साथ असर डाल रही हैं। मिडिल ईस्ट में सप्लाई की चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है, जबकि आरबीआई के नीतिगत रुख ने लिक्विडिटी और उधारी लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। साथ ही, एफआईआई की ओर से बिकवाली आक्रामक बनी हुई है।"
डिक्सेना ने आगे कहा, "तकनीकी तौर पर मार्केट का स्ट्रक्चर काफी कमजोर हो चुका है। 22,200 से 22,180 का दायरा अब एक अहम सपोर्ट जोन है, जो हालिया 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब है। 22,180 से नीचे का ब्रेकडाउन मंदी को और तेज कर सकता है, जबकि 22,600 के ऊपर रिकवरी ही बिकवाली का दबाव कम होने का पहला संकेत होगी। मौजूदा ओवरसोल्ड स्थितियों को आटोमेटिक खरीदारी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।"
बुलियन मार्केट और वैश्विक जोखिम
रिद्धििसद्धि बुलियंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी ने बताया कि अमेरिकी डॉलर के 18 महीने के उच्चतम स्तर पर बने रहने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें एक बार फिर बढ़ाए जाने की अटकलों के बीच सोना और चांदी दोनों अपने प्रमुख समर्थन स्तरों (क्रमशः 4,100 डॉलर और 60 डॉलर) से नीचे फिसल गए हैं।
कोठारी ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी उच्च ऊर्जा कीमतों, रिकॉर्ड कर्ज और एआई बूम से जुड़े जोखिमों के प्रति आगाह किया है। तकनीकी रूप से सोना अब 4,000 डॉलर के स्तर की ओर देख रहा है, जबकि चांदी का हेड-एंड-शोल्डर ब्रेकडाउन इसे अगले 57 डॉलर के स्तर पर ले जा सकता है।"
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 429 अंक टूटा, निफ्टी 22,600 के नीचे; रुपया 5 महीने के निचले स्तर पर