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सहायक भूमिकाओं से सम्मान तक सुरेश ओबेरॉय कथा

सहायक भूमिकाओं से सम्मान तक का सफर: सुरेश ओबेरॉय की कहानी

सुरेश ओबेरॉय का जन्म 17 दिसंबर 1946 को हुआ। उनका परिवार पहले बलूचिस्तान के क्वेटा में रहता था। देश के बंटवारे के बाद परिवार भारत आ गया और हैदराबाद में बस गया।

सहायक भूमिकाओं से सम्मान तक का सफर सुरेश ओबेरॉय की कहानी

Suresh Oberoi Biography |

जन्म और शुरुआती जीवन

सुरेश ओबेरॉय का जन्म 17 दिसंबर 1946 को हुआ। उनका परिवार पहले बलूचिस्तान के क्वेटा में रहता था। देश के बंटवारे के बाद परिवार भारत आ गया और हैदराबाद में बस गया। उनके पिता मेडिकल स्टोर चलाते थे और सुरेश भी कुछ समय तक उसी दुकान पर काम करते रहे, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा।

400 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे

अभिनय का सपना लिए सुरेश ओबेरॉय सिर्फ 400 रुपये लेकर मुंबई आ गए। यहां उन्होंने संघर्ष की राह चुनी और अपने सपनों को सच करने में जुट गए।

रेडियो और मॉडलिंग से मिली पहचान

1970 के दशक में उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। इसके बाद रेडियो में काम किया और मॉडलिंग की दुनिया में भी नाम बनाया। कुछ ही समय में वे जाने-माने मॉडल बन गए।

फिल्मों में एंट्री और सहायक भूमिकाएं

साल 1977 में फिल्म जीवन मुक्त से उन्होंने अभिनय करियर की शुरुआत की। हीरो बनने की चाह जरूर थी, लेकिन उन्हें ज्यादातर सहायक किरदार ही मिले। उन्होंने काला पत्थर, कुली, शराबी, लावारिस, मिर्च मसाला जैसी कई चर्चित फिल्मों में दमदार रोल निभाए।

नेशनल अवॉर्ड की उपलब्धि

फिल्म मिर्च मसाला (1985) में शानदार अभिनय के लिए सुरेश ओबेरॉय को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। यह उनके करियर का सबसे बड़ा सम्मान रहा।

डबिंग की दुनिया में भी आवाज का जादू

अभिनय के साथ-साथ वे बेहतरीन डबिंग आर्टिस्ट भी रहे हैं। द लायन किंग और द मम्मी जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी प्रभावशाली आवाज दी।

फिल्मों से दूरी और अध्यात्म की राह

साल 2009 के बाद उन्होंने फिल्मों में काम कम कर दिया। बाद में मणिकर्णिका और एनिमल जैसी फिल्मों में नजर आए, लेकिन अब उनका झुकाव अध्यात्म की ओर है। वे ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े हैं और मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी सक्रिय हैं।

परिवार और विरासत

सुरेश ओबेरॉय की शादी यशोधरा से हुई। उनके दो बच्चे हैं—मेघना और विवेक ओबेरॉय। विवेक ओबेरॉय ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और पिता की अभिनय विरासत को आगे बढ़ाया।

कुछ खास बातें

  • सुरेश ओबेरॉय राजनीति से भी जुड़े हैं और एक पार्टी के सदस्य रहे हैं।
  • वे सिंगिंग और लेखन में भी रुचि रखते हैं।
  • उन्होंने कविताओं की एक किताब भी लिखी है।

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