रायपुर में पद्म विभूषण तीजन बाई का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पांडवनी को विश्वभर में पहचान दिलाई और 5 दशक तक लोक कला का योगदान दिया।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। पद्म विभूषण से सम्मानित और प्रसिद्ध पांडवनी गायिका तीजन बाई का रविवार को रायपुर में निधन हो गया। वह 72 वर्ष की थीं। उन्होंने पांच दशकों से अधिक समय तक छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककथा परंपरा पांडवनी को संरक्षित और विश्वभर में लोकप्रिय बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
लंबे समय से थीं अस्वस्थ
खबरों के अनुसार, तीजन बाई पिछले कई सप्ताह से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं और उनका इलाज एम्स रायपुर में चल रहा था। रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा, "पद्म विभूषण और पद्म श्री से सम्मानित तीजन बाई का निधन हो गया है। उन्होंने पूरे देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"
13 साल की उम्र में शुरू किया था सफर
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई ने महज 13 वर्ष की आयु में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। उन्होंने महाभारत की कथाओं पर आधारित पांडवनी गायन को नई पहचान दिलाई और इसे देश-दुनिया तक पहुंचाया। उस दौर में जब महिलाएं परंपरागत रूप से बैठकर 'वेदमती' शैली में पांडवनी प्रस्तुत करती थीं, तीजन बाई ने पुरुष कलाकारों के प्रभुत्व वाली खड़े होकर प्रस्तुति देने वाली 'कपालिका' शैली को अपनाकर एक नई मिसाल कायम की। उनके इस साहसिक कदम ने पांडवनी कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
देश-दुनिया में बिखेरी लोक संस्कृति की छटा
50 वर्षों से अधिक लंबे अपने करियर में तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित दुनिया के कई देशों में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। शुरुआती दौर में सामाजिक विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने पांडवनी के संरक्षण और प्रचार का कार्य जारी रखा और नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा बनीं। भारतीय लोक संस्कृति में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।
(एएनआई)
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