केंद्र सरकार पेंशन सेक्टर में 100% FDI की तैयारी में है। विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए संसद में नया बिल लाया जा सकता है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बीमा क्षेत्र के बाद अब पेंशन सेक्टर में भी बड़े बदलाव की तैयारी में है। सरकार विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए पेंशन सेक्टर में विदेशी कंपनियों के लिए दरवाजे पूरी तरह खोलने पर विचार कर रही है। पेंशन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को बढ़ाकर 100% किया जा सकता है। इस संबंध में सरकार संसद के आगामी सत्र में बिल ला सकती है। केन्द्र बीमा क्षेत्र में पहले ही एफडीआई की सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया है।
FDI सीमा बढ़ाने की योजना
पेंशन फंड में FDI की सीमा फिलहाल 49% है। सूत्रों के मुताबिक इससे जुड़ा एक बिल संसद के अगले सत्र में पेश किया जा सकता है। यह कदम पेंशन सेक्टर को इंश्योरेंस सेक्टर के बराबर लाने के लिए उठाया जा रहा है, जहां पहले से ही 100% विदेशी निवेश की इजाजत है।
बीमा क्षेत्र में पहले हो चुका बदलाव
याद रहे संसद ने पिछले साल बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के लिए एक बिल को मंजूरी दी थी। बीमा अधिनियम, 1938 में अंतिम संशोधन 2015 में किया गया था, जिसके बाद एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई थी।
PFRDA एक्ट में होगा संशोधन
सूत्रों के अनुसार, पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013 में पेंशन क्षेत्र में एफडीआई सीमा बढ़ाने के लिए संशोधन मानसून या शीतकालीन सत्र में विभिन्न अनुमोदनों के आधार पर आ सकता है।
फिलहाल 49% है विदेशी निवेश सीमा
सूत्रों का कहना है कि पेंशन सेक्टर में FDI लिमिट बढ़ाने के लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ऐक्ट, 2013 में संशोधन किया जाएगा। यह बिल अलग-अलग मंजूरियों के आधार पर मानसून सत्र या शीतकालीन सत्र में आ सकता है। फिलहाल, पेंशन फंड में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 49% तय है।
NPS ट्रस्ट को अलग करने की तैयारी
संशोधन बिल में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ट्रस्ट को PFRDA से अलग करने का प्रावधान भी हो सकता है। अभी NPS ट्रस्ट की शक्तियां, कामकाज और जिम्मेदारियां PFRDA रेगुलेशन 2015 के तहत तय की जाती हैं। इसका उद्देश्य NPS ट्रस्ट को पेंशन नियामक से अलग रखना और 15 सदस्यों की सक्षम बोर्ड द्वारा प्रबंधित करना है। PFRDA का गठन पेंशन क्षेत्र के व्यवस्थित विकास को बढ़ावा देने और सदस्यों के हितों की रक्षा करने के लिए किया गया था।
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