'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा अभी भी बड़े पद पर बैठे लोग छात्रों को धमका रहे हैं।
महाराष्ट्र: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार, शिक्षा व्यवस्था और विपक्ष की राजनीति पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी बात की। धमकियों से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए दिपके ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
छात्रों को धमका रहे उच्च पदों पर बैठे लोग
उन्होंने बताया कि उन्हें चेतावनी दी गई थी कि भाजपा में शामिल न होने पर उनके परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दिपके ने शर्मिंदगी जताई कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे उच्च पदों पर बैठे लोग उन जैसे छात्र को धमका रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इन उच्च पदों पर बैठे लोगों को बच्चों को डराने-धमकाने का सहारा लेना पड़ता है तो इन पदों का क्या महत्व है।
राजनीति नहीं पतंजलि उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान दें बाबा राम देव-दिपके
नई पीढ़ी को गुमराह करने के आरोपों का जवाब देते हुए दिपके ने कहा कि अगर लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ना, सरकार पर सवाल उठाना और अपने भविष्य और शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करना संस्कृति को भ्रष्ट करना है, तो वह अपना संघर्ष जारी रखेंगे। योग गुरु बाबा रामदेव पर टिप्पणी करते हुए दिपके ने कहा कि रामदेव को राजनीति पर बयान देने के बजाय पतंजलि उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
दिपके ने कहा, मुझे लगता है कि जेनरेशन Z संस्कृति, लोकतंत्र और देश को अच्छी तरह संभाल सकती है। आपको अपने दोषपूर्ण पतंजलि उत्पादों की चिंता करनी चाहिए, वरना पतंजलि बंद हो सकती है।
सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है पुलिस
राहुल गांधी द्वारा अमित शाह पर लगाए गए आरोपों के संबंध में दिपके ने कहा कि उनके विचार में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई गोलीबारी की घटना की जिम्मेदारी अमित शाह की है। उन्होंने तर्क दिया कि क्योंकि पुलिस सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है, इसलिए गृह मंत्री का इन घटनाओं से अवगत होना स्वाभाविक था। भाजपा द्वारा गोलीबारी की घटना से इनकार करने का खंडन करते हुए दिपके ने कहा कि उन्होंने बिहार के अस्पतालों में घायल छात्रों को व्यक्तिगत रूप से देखा है।
एके-47 जैसे हथियारों का किया गया इस्तेमाल
उन्होंने दावा किया कि बेल्ट गन और एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र घायल हुए और कुछ की आंखों की रोशनी भी चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों का इस्तेमाल छात्रों के खिलाफ किया गया।
विपक्ष के साथ गठबंधन के सवाल पर दिपके ने कहा कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी विपक्षी दलों और आम जनता को एकजुट होना होगा।
विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी छात्रों को धमकाया जा रहा
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी छात्रों को उनके घरों में धमकाया जा रहा है, गिरफ्तार किया जा रहा है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं करती है। विदेशी फंडिंग के आरोपों के संदर्भ में दिपके ने टिप्पणी की कि अगर उन्हें वास्तव में विदेशी फंडिंग मिली है, तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता होगी, जिसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री जिम्मेदार होंगे।
नए शिक्षा मंत्री को प्रतिस्थापन प्रतिरूप बताया
शिक्षा मंत्री के परिवर्तन और प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, दिपके ने नए शिक्षा मंत्री को पिछले मंत्री की महज प्रतिस्थापन प्रतिरूप बताया। भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्टी बलात्कार के आरोपियों को संरक्षण और सम्मान देती है, जबकि छात्रों और आम नागरिकों पर लाठीचार्ज और गोलियां चलाई जाती हैं। उन्होंने कुलदीप सेंगर मामले का हवाला देते हुए भाजपा को निशाना बनाया।
बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
अगर देश का शिक्षा मंत्री बलात्कारियों का स्वागत और प्रशंसा करता है, तो इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री ने किस तरह के व्यक्ति को सत्ता सौंपी है। आप देश को क्या संदेश दे रहे हैं? एक ऐसा शिक्षा मंत्री जो बलात्कारियों का समर्थन और स्वागत करता है, लेकिन आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं? उनकी पार्टी में और कौन है? यह ऐसे लोगों से भरी पड़ी है। कुलदीप सेंगर का क्या? उनकी सरकार में राम रहीम जैसे लोगों को पैरोल पर रिहा किया जाता है। यह एक ऐसी सरकार है जो अपराधियों और बलात्कारियों का समर्थन करती है।
महाराष्ट्र में भी एक बड़े आंदोलन की जरूरत
वहीं, महाराष्ट्र में बार-बार हो रही पेपर लीक की घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए दिपके ने जोर दिया कि राज्य में भी एक बड़े आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि हालांकि सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए तुरंत अदालती कार्यवाही का वादा किया था, लेकिन सीबीआई के वकील के अदालत में पेश न होने के कारण पहली ही सुनवाई स्थगित कर दी गई। उन्होंने कहा कि चुनावी रैलियां तो तय समय पर होती हैं, लेकिन सरकार शिक्षा से संबंधित मामलों को लेकर गंभीर नजर नहीं आती।
बिहार चुनावों के दौरान क्यों चलाई जाती हैं विशेष ट्रेनें
उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार चुनावों के दौरान विशेष ट्रेनें क्यों चलाई जाती हैं, जबकि महाराष्ट्र में पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी परीक्षाओं में बैठने के लिए यात्रा करने वाले छात्रों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि दूरदराज के जिलों से आने वाले छात्रों को सड़कों पर रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है और अक्सर उन्हें समय पर भोजन भी नहीं मिलता।
सरकार छात्रों की कठिनाइयों को समझने में रहती है विफल
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) से जुड़े हालिया पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा कि न तो नरेंद्र मोदी, न धर्मेंद्र प्रधान और न ही देवेंद्र फडणवीस शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता केवल चुनाव जीतना है, छात्रों का भविष्य नहीं। दिपके ने यह भी दावा किया कि क्योंकि कई भाजपा नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और उन्हें सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की चिंता नहीं करनी पड़ती, इसलिए सरकार छात्रों की कठिनाइयों को समझने में विफल रहती है।
(एएनआई)
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