रेंट एग्रीमेंट के बगैर भी किरायेदार के खिलाफ बेदखली का हो सकता है मुकदमा
इलाहाबाद हाई कोर्ट का मकान मालिकों के पक्ष में बड़ा फैसला
प्रयागराज।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मकान मालिकों के पक्ष में बड़ा फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के बाद कहा कि किरायेदार और मकान मालिक के बीच किरायेदारी एग्रीमेंट नहीं होने और रेंट अथॉरिटी को किरायेदारी की जानकारी नहीं दिये जाने के बावजूद किराया प्राधिकरण (रेंट अथॉरिटी) के पास किरायेदार को बेदखल करने के लिए मकान मालिक के आवेदन पर सुनवाई का अधिकार है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने केनारा बैंक शाखा कार्यालय अलीगढ़, बरेली की मेसर्स टिफको एंड एसोसिएट्स व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया है। संबंधित मामलों में मकान मालिकों ने याचियों के खिलाफ रेंट अथॉरिटी व लघुवाद न्यायालय के समक्ष बेदखली के लिए आवेदन दायर किया था। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट में वाद दायर किया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम कायदा तहत किराया प्राधिकरण (रेंट अथॉरिटी) के पास किरायेदार को बेदखल करने के लिए मकान मालिक के आवेदन पर सुनवाई का अधिकार है। भले ही किरायेदारी एग्रीमेंट न हुआ हो और न ही रेंट अथॉरिटी को किरायेदारी की जानकारी दी गई हो। ऐसे में बिना रेंट एग्रीमेंट के भी मकान मालिक किरायेदार के खिलाफ बेदखली का मुकदमा कर सकता है।
केनरा बैंक के मामले में मकान मालिक की ओर से अधिवक्ता विपुल राज गौतम ने हाईकोर्ट के अमित गुप्ता बनाम गुलाब चंद्र कनेडिया के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि रेंट अथॉरिटी के समक्ष रेंट एग्रीमेंट प्रस्तुत नहीं किया है तब भी लघुवाद न्यायालय में वाद दायर किया जा सकता है। एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि कानून में लिखित समझौते का प्रावधान है, लेकिन इसके अभाव में मकान मालिक को उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
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