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मैहर में ढहा 55 लाख का पुल

बारिश में ढहा 55 लाख का पुल, 24 गांवों का आवागमन प्रभावित

मैहर में करीब 55 लाख रुपये की लागत से बना पुल पहली बारिश में टूट गया, जिससे 24 गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं।

बारिश में ढहा 55 लाख का पुल 24 गांवों का आवागमन प्रभावित

मैहर में ढहा 55 लाख का पुल |

मैहर: विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी निर्माण में निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला मैहर जिले में सामने आया है। बुढेरुआ-जरियारी मार्ग पर बरगी नहर के ऊपर करीब 55 लाख रुपए की लागत से बनाया गया पुल पहली ही बारिश में धराशायी हो गया। पुल का स्लैब टूटकर नहर में जा गिरा, जिससे जरियारी, बुढेरुआ सहित आसपास के करीब 24 गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। हादसे के बाद ग्रामीणों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भारी आक्रोश है।

एक सप्ताह पहले ही दिखने लगा था धंसाव

ग्रामीणों के मुताबिक पुल के पिलरों में करीब एक सप्ताह पहले ही चार इंच तक धंसाव दिखाई देने लगा था। इसके बावजूद समय रहते पुल की तकनीकी जांच और आवश्यक सुधार नहीं कराया गया। अब बारिश के दौरान पुल का स्लैब टूटने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुल के टूटे हिस्से से बाहर निकले सरियों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

16 एमएम की जगह 12 एमएम के सरिये का किया इस्तेमाल

स्थानीय लोगों का दावा है कि पुल की ड्राइंग और तकनीकी मापदंडों के अनुसार जहां 16 एमएम के सरियों का इस्तेमाल किया जाना था, वहां मौके पर 10 से 12 एमएम के सरिये दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय स्तर पर सामने आई निर्माण संबंधी खामियों में सरियों के बीच निर्धारित दूरी का पालन नहीं करने, पेडेस्ट्रल और एबटमेंट के निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी, स्लैब कास्टिंग के बाद मिट्टी का पर्याप्त कॉम्पैक्शन नहीं करने जैसी बातें सामने आ रही हैं। 

ढलान और जल निकासी की व्यवस्था पर उठे सवाल

इसके अलावा पुल पर ढलान और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल पर रेलगार्ड तक नहीं लगाए गए थे। जिस पुल से क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की आवाजाही होती थी, उसके इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पुल निर्माण पर लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन पहली ही बारिश में इसकी वास्तविक गुणवत्ता सामने आ गई। 

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