नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर निवासी अमर्त्य सेन ने एसआईआर की प्रक्रिया को अनावश्यक जल्दबाजी में किया जा रहा कार्य बताया है।
एसआईआर के तहत मिला था नोटिस
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर (शांतिनिकेतन) निवासी अमर्त्य सेन ने एसआईआर की प्रक्रिया को अनावश्यक जल्दबाजी में किया जा रहा कार्य बताया है। चुनाव आयोग ने एसआईआर के तहत सुनवाई के दौरान अमर्त्य सेन को भी नोटिस जारी किया था। इस कदम का सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने कड़ा विरोध किया था। बाद में चुनाव अधिकारी उनके आवास पहुंचे और आवश्यक जानकारी एकत्र की।
चुनाव से पहले प्रक्रिया पर चिंता
अमर्त्य सेन का कहना है कि विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले एसआईआर कराई जा रही है, जबकि इस तरह की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय और विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
लोकतंत्र के लिए अहम है एसआईआर
उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया मताधिकार को मजबूत करती है। अगर इसे पर्याप्त समय और सावधानी के साथ किया जाए, तो यह एक अच्छी और मजबूत लोकतांत्रिक प्रक्रिया साबित हो सकती है।
दस्तावेज जमा करने में आ रही दिक्कत
अमर्त्य सेन ने चिंता जताई कि मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज चुनाव अधिकारियों के पास जमा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। कई मतदाता इन कागजातों को आसानी से जमा भी नहीं कर पा रहे हैं।
आसान विकल्प देने की जरूरत
उन्होंने सुझाव दिया कि मतदाताओं को ऐसे दस्तावेज जमा करने की अनुमति होनी चाहिए, जो उनके पास उपलब्ध हों और जिन्हें वे आसानी से पेश कर सकें।
अधिकारियों की परेशानी पर भी ध्यान
अमर्त्य सेन ने एसआईआर के कार्य में लगे चुनाव अधिकारियों की परेशानियों को भी महसूस किया। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे अधिकारियों पर काम का अत्यधिक बोझ न पड़े और वे बिना दबाव के अपना कार्य कर सकें।
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