केंद्रीय बजट 2026 में विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़े प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों में नए हवाई अड्डों का विकास और मौजूदा बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल है।
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़े प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों में नए हवाई अड्डों का विकास और मौजूदा बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल है। सरकार क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (UDAN योजना) को मजबूत करने और एटीएफ (ATF) पर करों में कमी के साथ नए एयरलाइन लाइसेंसों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
वैश्विक विमानन हब बनने की दिशा में कदम
संसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार एक फरवरी को संसद में बजट प्रस्तुत करेंगी। बजट 2026 में इस बार भारत को वैश्विक विमानन हब बनाने के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल सेवाओं के लिए घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर हो सकता है। इसके अन्तर्गत एयरलाइन बेड़े में बढ़ोतरी और नई एयरलाइनों को आकर्षित करने के लिए कर छूट जैसे उपायों का ऐलान संभव है। बजट में विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) करों को कम करने पर विचार किया जा रहा है, जो फिलहाल परिचालन लागत का 30-40 प्रतिशत हैं।
वर्ष 2025 में हवाई यात्रियों की संख्या में हुई तेज वृद्धि
भारत में बीते कुछ वर्षों के दौरान विमानन क्षेत्र में तेजी से यात्रियों की संख्या बढ़ी है, जिसके भविष्य में तेजी से बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सरकार नए हवाई अड्डों के विस्तार से लेकर बेड़े में शामिल होने वाले विमानों और उनके लिए समुचित ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विमानन क्षेत्र को लेकर आगामी आम बजट में कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं। भारत में वर्ष 2025 में हवाई यात्रियों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई, जो 25 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक बन गया है।
पांच वर्षों में 50 नए एयरपोर्ट और 1700 नए यात्री विमानों का है लक्ष्य
देश में तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर अगले पांच वर्षों में देश 50 से अधिक नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जाना है। इसी जरूरत को देखते हुए भारत ने 1700 नए यात्री विमानों को ऑर्डर दिया है, जो अगले पांच से 10 वर्षों में बेड़े में शामिल होंगे। मौजूदा समय में संचालित हवाई अड्डों की संख्या 164 से अधिक है, जिसमें घरेलू, अंतरराष्ट्रीय, हवाई पट्टियां और नागरिक एन्क्लेव भी शामिल हैं। ऐसे में हवाई यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखकर केंद्रीय बजट में बड़े ऐलान होने की संभावना है। खासकर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर केंद्र सरकार को बीते कुछ वर्षों में विशेष ध्यान रहा है। इसके लिए पहले से उड़ान योजना संचालित है, जो क्षेत्रीय संपर्क योजना है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को किफायती बनाना है।
150 किमी के दायरे वाली नीति पर होगा पुनर्विचार
हवाई सेवाओं को गति देने के उद्देश्य से बड़े शहरों में एक से अधिक हवाई अड्डे बनाए जा रहे हैं। दिल्ली और एनसीआर में आने वाले यात्रियों की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए जेवर (गौतमबुद्धनगर) में नया हवाई अड्डा बनाया जा रहा है, जो अगले कुछ महीनों में संचालित होगा। इसी प्रकार मुंबई के नवी मुंबई में एयरपोर्ट बनाया गया है जो संचालित हो चुका है। ऐसे में बाकी बड़े शहरों के लिए भी बजट में नया हवाई अड्डा बनाने का ऐलान हो सकता है। बीते दिनों केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने एक कार्यक्रम में कहा था कि देश भर में हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार 150 किलोमीटर के दायरे में दो हवाई अड्डों पर प्रतिबंध लगाने वाली नीति की समीक्षा करेगी।
कलपुर्जे बनाने और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनने का लक्ष्य
मोदी सरकार अब हवाई जहाजों की मरम्मत और भारत में ही हवाई जहाज और उनके कलपुर्जे तैयार हों, इस पर भी ध्यान दे रही है। बजट में विमानों के स्पेयर पार्ट्स और छोटे विमानों के निर्माण के लिए पीएलआई योजना को बढ़ावा दिया जा सकता है, जो भारत को एक वैश्विक उड्डयन केंद्र बनाने की दिशा में एक कदम है।
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