बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने जुलाई व अगस्त 2024 में हुए अशांति को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त पर एक पक्षपातपूर्ण, एकतरफा और मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली। बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त पर देश में जुलाई और अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले अशांति के दौरान शेख हसीना शासन के तहत हुए उल्लंघनों पर एक पक्षपातपूर्ण, एकतरफा और मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया।
रिपोर्ट के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक आपत्ति की तैयारी
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय द्वारा 2024 जुलाई विद्रोह पर जारी एक रिपोर्ट के जवाब में मीडिया को संबोधित करते हुए, देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अधीन सेवा देने वाले पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट और इसके लेखकों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासचिव और संबंधित संयुक्त राष्ट्र निकायों को एक औपचारिक आपत्ति प्रस्तुत की जाएगी। उसमें आयोग पर उत्पीड़ितों की बजाय उत्पीड़न का समर्थन करने वाली कहानी का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल, मृतकों के आंकड़ों पर उठे संदेह
वह इंटरनेशनल क्राइम रिसर्च फाउंडेशन द्वारा लॉ वैली सॉलिसिटर्स के सहयोग से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उसमें अवामी लीग के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे जिन्होंने रिपोर्ट पर अपने विचार प्रस्तुत किए। महमूद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बताए गए हताहतों की संख्या की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया, जिसमें बार-बार उतार-चढ़ाव - 400 से 800, फिर 1,200, और बाद में 2,000 - की ओर इशारा किया, जबकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में 1,400 मौतों का उल्लेख किया गया था, जैसा कि एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है।
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