प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में आयोजित भाजपा की परिवर्तन संकल्प सभा में टाटा उद्योग को लेकर कोई चर्चा न होने से भाजपा की स्थिति असहज हो गई है।
सिंगूर मुद्दे पर भाजपा की चुप्पी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में आयोजित भाजपा की परिवर्तन संकल्प सभा में टाटा उद्योग को लेकर कोई चर्चा न होने से भाजपा की स्थिति असहज हो गई है। वहीं, इस चुप्पी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेताओं को भाजपा पर निशाना साधने का बड़ा मौका दे दिया है।
सभा से पहले भाजपा की तैयारियां
प्रधानमंत्री मोदी की सभा को सफल बनाने के लिए भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार ने सिंगूर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने घर-घर जाकर स्थानीय किसानों से मुलाकात की और उन्हें सभा में शामिल होने का न्योता दिया। सभा के दिन गांवों में दोपहर के भोजन की भी व्यवस्था की गई।
किसानों से किए गए वादे
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार ने खास तौर पर उन किसानों से मुलाकात की थी, जिनकी जमीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान टाटा के नैनो उद्योग के लिए अधिग्रहित की गई थी। किसानों को भरोसा दिलाया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टाटा को वापस लाकर सिंगूर में उद्योग स्थापित करने को लेकर बात करेंगे। इससे किसानों में उम्मीद जगी कि उनकी जमीन और उद्योग के भविष्य पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई ठोस संकेत मिलेगा।
सभा में नहीं उठा सिंगूर का मुद्दा
हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सिंगूर और टाटा उद्योग का कोई उल्लेख नहीं हुआ। इससे किसानों में निराशा फैल गई और भाजपा की रणनीति पर सवाल उठने लगे। प्रधानमंत्री मोदी के सभा स्थल से रवाना होने के बाद इलाके में टीएमसी नेताओं की सक्रियता बढ़ गई। राज्य के कृषि विपणन मंत्री बेचाराम मन्ना, परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती और स्थानीय विधायक कबरी मन्ना ने किसानों से मुलाकात की।
टीएमसी ने उठाए तीखे सवाल
टीएमसी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार और भाजपा के अन्य नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि सिंगूर के मूल मुद्दे को क्यों दरकिनार किया गया। नेताओं ने कहा कि किसानों ने उद्योग के लिए जमीन दी है और उनकी सहमति के बिना कोई भी उद्योग स्थापित नहीं किया जा सकता।
सियासी गर्मी बढ़ने के आसार
सिंगूर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भाजपा की चुप्पी और टीएमसी का आक्रामक रुख आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और गरमाने वाला माना जा रहा है।
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