पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के तहत वोटरों की सुनवाई के दौरान नियुक्त सभी सूक्ष्म पर्यवेक्षक राज्य के ही हैं, इनमें से कोई भी दूसरे राज्य से नहीं है।
ममता बनर्जी के आरोपों पर सीईओ का जवाब
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि एसआइआर के तहत वोटरों की सुनवाई के वक्त मौजूदगी के लिए नियुक्त सूक्ष्म पर्यवेक्षकों में से एक भी सूक्ष्म पर्यवेक्षक किसी दूसरे राज्य का नहीं है। वे कोलकाता में नजरूल मंच में सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को दिए गए प्रशिक्षण शिविर में मौजूद हुए।
टीएमसी की बैठक में लगाए गए थे आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में हुई अपनी पार्टी टीएमसी के बूथ लेवेल एजेंटों की बैठक में चुनाव आयोग द्वारा दूसरे राज्यों के सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को तैनात करने का आरोप लगाया था और कहा कि पर्यवेक्षकों को बांग्ला नहीं आने के कारण वोटरों की समस्या हो सकती है।
सूक्ष्म पर्यवेक्षक इसी राज्य के सरकारी कर्मी
मुख्य चुनाव अधिकारी अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्त किए गए सूक्ष्म पर्यवेक्षक इसी राज्य में सरकारी कर्मी हैं। लेकिन उनमें से कोई दूसरे राज्यों का भी रहने वाला हो सकता है।
राज्य में कार्यरत कर्मी माने जाएंगे स्थानीय निवासी
लेकिन जिन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है वे पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। उनका इशारा यह है कि दूसरे राज्य से आकर इस राज्य में नौकरी करने वाले और यही के वाशिंदा भी हैं। उन्हें इसी राज्य का वाशिंदा माना जाएगा।
वोटरों की सुनवाई को लेकर दिशा-निर्देश
वोटरों की सुनवाई के लिए नियुक्त सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण शिविर में यह समझा दिया गया है कि वोटरों की सुनवाई के वक्त क्या-क्या करना है। इसके लिए चुनाव आयोग की ओर से दिशा-निर्देश तय किया गया है।
जरूरत पड़ने पर ही होगी सुनवाई
सुनवाई के लिए उन्हीं वोटरों को बुलाया जाएगा जिनकी जरूरत समझी जाएगी। सुनवाई के वक्त सूक्ष्म पर्यवेक्षक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के कामकाज की निगरानी करेंगे।
नियुक्ति को लेकर अधिकारियों में नाराजगी
सूत्रों का कहना है कि ईआरओ और एईआरओ को इस बात की नाराजगी है कि उन पर ठीक से काम नहीं करने का संदेह किया जा रहा है और उनके पीछे निगरानी के लिए सूक्ष्म पर्यवेक्षक को लगाया गया है। लेकिन कहा यह जा रहा है कि सुनवाई की पारदर्शिता बनी रहे और सतर्कता से काम हो, इसलिए सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है।
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