नागपुर की श्रीराम फूड इंडस्ट्री, रायपुर की स्पोन एंटरप्राइजेज और हरियाणा की एनएम फूडिम्पेक्स के लाइसेंस भी रद्द कर दिए।
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक उथल पुथल के बीच चावल निर्यात के मोर्चे पर भारत को बड़ा झटका लगा है। चीन समेत तमाम देशों में भारत का चावल काफी पसंद किया जाता है। चीन में भारत के गैर-बासमती चावल की काफी मांग है, लेकिन हाल ही में चीन ने भारत के चावल की बड़ी खेप को लौटाते हुए इसके आयात पर रोक लगा दी है। चीन ने भारतीय चावलों की खेप को जेनेटिकली मॉडिफाइड होने का आरोप लगाया है।
तीन कंपनियों का निर्यात लाइसें रद्द
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चीन ने भारत के नॉन-बासमती चावल निर्यात (Rice exports to China) की 70 से अधिक खेपों को लौटा दिया है। चीन का आरोप है कि इन चावलों के जेनेटिकली मॉडिफाइड (आनुवंशिक रूप से संशोधित) होने का दावा करते हुए यह कार्रवाई की है। चीन का आरोप है कि इन चावल की खेपों में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) पाए गए हैं। चीन ने भारत से आयात होने वाली तीन निर्यात कंपनियों के चावल में जीएमओ (GMO) होने का दावा किया है और इन खेपों को वापस भेजकर संबंधित कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इनमें नागपुर की श्रीराम फूड इंडस्ट्री, रायपुर की स्पोन एंटरप्राइजेज और हरियाणा की एनएम फूडिम्पेक्स प्रमुख हैं। बदले हालात में निर्यातकों ने चावल के लगभग 200 कंटेनर रोक रखे हैं क्योंकि बीजिंग में क्या स्वीकार्य होगा और क्या नहीं, इस पर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।
भारत सरकार और आईसीएआर ने आरोपों का किया खारिज
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी बंदरगाहों पर अस्वीकृति ऐसे समय में हुई है जब चाइना सर्टिफिकेशन एंड इंस्पेक्शन ग्रुप (सीसीआईसी) का भारतीय कार्यालय विशाखापत्तनम स्थित अपनी परीक्षण सुविधा में शिपमेंट का निरीक्षण और अनुमोदन कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले पिछले सप्ताह में ही चीन ने चावल की कम से कम चार नई खेपें वापस भेज दीं। मार्च में भी चीन ने भारत से चावल की तीन खेपें अस्वीकार कर दी थीं।भारत सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने चीन के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भारत का स्पष्ट रुख है कि देश में कपास को छोड़कर किसी भी अन्य जीएम (GM) फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है। भारत से निर्यात होने वाला चावल पूरी तरह से नॉन-जीएमओ (Non-GMO) है।
भारत में जीएम खेती नहीे होतीः आईसीएआर
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने पिछले महीने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत में किसी भी प्रकार के जीएम चावल की खेती नहीं की जाती। पर्यावरण मंत्रालय के अधीन जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) ने भी पुष्टि की थी कि देश में जीएम राइस को मंजूरी नहीं दी गई है। इस मामले में आश्चर्यजनक पहलू ये है कि चीन खुद जीएम चावल का उत्पादन (Production of GM Rice) करता है। लेकिन भारतीय चावल पर सवाल उठा रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों में यह भावना उत्पन्न हो रही है कि चीन भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने की योजना के तहत ऐसा कर रहा है। कई व्यापारियों का मानना है कि चीन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को कमजोर करना चाहता है।
भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय साख की चिंता बढ़ी
इस विवाद से भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय साख पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। चीन और अन्य देशों द्वारा अतिरिक्त सख्त जांच से लॉजिस्टिक्स की लागत और माल का भंडारण खर्च बढ़ सकता है, जिससे सीधे तौर पर भारतीय निर्यातकों और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।यह विवाद ऐसे समय पर गहराया है जब वैश्विक स्तर पर कृषि निर्यात नीति और मानकों को लेकर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। इस संकट से निपटने के लिए भारतीय निर्यातकों की संस्थाएं वाणिज्य मंत्रालय के साथ मिलकर स्थिति को संभालने का प्रयास कर रही हैं।
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